जाति व्यवस्था को चुनौती | challenging the caste system ctet history topic wise
जाति व्यवस्था : समाज में सिर्फ़ स्त्रियों और पुरुषों के बीच ही फर्क नहीं था। ज्यादातर इलाकों में लोग जातियों में भी बँटे हुए थे। ब्राह्मण और क्षत्रिय खुद को "ऊँची जाति" का मानते थे। इसके बाद व्यापार और महाजनी आदि से जुड़ी जातियों का स्थान आता था। जिन्हें प्रायः वैश्य कहा जाता था। फिर काश्तकार, बुनकर व कुम्हार जैसे दस्तकार आते थे जिन्हें शूद्र कहा जाता था। इस श्रेणीक्रम की सबसे निचली पायदान पर ऐसी जातियाँ थीं जो गाँवों-शहरों को साफ-सुथरा रखती थीं या ऐसे काम धंधे करती थीं जिन्हें ऊँची जातियों के लोग "दूषित कार्य" मानते थे यानी ऐसे काम जिनकी वजह से उनकी जाति 'भ्रष्ट' हो जाती थी। ऊँची जातियाँ निचले पायदान पर खड़ी इन जातियों के लोगों को "अछूत" मानती थीं। इन लोगों को मंदिरों में प्रवेश करने, सवर्ण जातियों के इस्तेमाल वाले कुओं से पानी निकालने या ऊँची जातियों के आधिपत्य वाले घाट-तालाबों पर नहाने की छूट नहीं होती थी। उन्हें निम्न दर्जे का मनुष्य माना जाता था। वर्तमान आंध्र प्रदेश में मदिगा एक महत्त्वपूर्ण "अछूत" जाति रही है। व...