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CTET SST PYQ Pedagogy Practice Set 01

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  'मस्जिद' के विषय पर ऐतिहासिक कल्पना जागृत करने के लिए सबसे प्रभावी विधि होगी– मस्जिद के ऊपर एक किवदंती सुनाना। किसी विशेषज्ञ को निमंत्रित करना। किसी स्थानीय मस्जिद की यात्रा आयोजित करना। एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिखाना। उत्तर– C (प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त ज्ञान सुगम ढंग से मिलता है और कभी न भूलने वाला होता है। जिससे विद्यार्थियों में सामाजिक और सहयोग की भावना का विकास होगा।) मानचित्र, सिक्के एवं समयरेखा ________ शिक्षण के लिए सबसे अधिक उपयुक्त हैं। अर्थशास्त्र  राजनीतिक और सामाजिक जीवन  इतिहास  समाजशास्त्र उत्तर– C (मानचित्र, सिक्के एवं समयरेखा इतिहास शिक्षण के लिए सबसे अधिक उपयुक्त हैं। इतिहास की घटनायें किसी एक विशेष काल में मानव व्यवहार के उदाहरणों को व्यक्त करती है। अतः इनका अध्ययन वर्तमान समय में हमारे व्यवहार को आवश्यक मार्गदर्शन देने में सहायक होगा।) सामाजिक विज्ञान के शिक्षण में 'समुदाय' एक महत्वपूर्ण संसाधन हैं क्योंकिः- यह सस्ता और सुलभ है। वृद्ध लोग बुद्धिमान होते हैं और उनके पास समय है। समुदाय के ज्ञान को बिना आलोचना के स्वीकार किया जा सकता है। यह वास्तव...

जाति व्यवस्था को चुनौती | challenging the caste system ctet history topic wise

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जाति व्यवस्था : समाज में सिर्फ़ स्त्रियों और पुरुषों के बीच ही फर्क नहीं था। ज्यादातर इलाकों में लोग जातियों में भी बँटे हुए थे।  ब्राह्मण और क्षत्रिय खुद को "ऊँची जाति" का मानते थे।  इसके बाद व्यापार और महाजनी आदि से जुड़ी जातियों का स्थान आता था। जिन्हें प्रायः वैश्य कहा जाता था। फिर काश्तकार, बुनकर व कुम्हार जैसे दस्तकार आते थे जिन्हें शूद्र कहा जाता था।  इस श्रेणीक्रम की सबसे निचली पायदान पर ऐसी जातियाँ थीं जो गाँवों-शहरों को साफ-सुथरा रखती थीं या ऐसे काम धंधे करती थीं जिन्हें ऊँची जातियों के लोग "दूषित कार्य" मानते थे यानी ऐसे काम जिनकी वजह से उनकी जाति 'भ्रष्ट' हो जाती थी।  ऊँची जातियाँ निचले पायदान पर खड़ी इन जातियों के लोगों को "अछूत" मानती थीं।  इन लोगों को मंदिरों में प्रवेश करने, सवर्ण जातियों के इस्तेमाल वाले कुओं से पानी निकालने या ऊँची जातियों के आधिपत्य वाले घाट-तालाबों पर नहाने की छूट नहीं होती थी। उन्हें निम्न दर्जे का मनुष्य माना जाता था। वर्तमान आंध्र प्रदेश में मदिगा एक महत्त्वपूर्ण "अछूत" जाति रही है। व...