Class 7 SST Chapter 4 ncert Solution - नवारंभ - नगर एवं राज्य

अध्याय 04: नवारंभ - नगर एवं राज्य

प्रश्न 1. भारत में द्वितीय नगरीकरण (Second Urbanisation) से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: प्रथम सहस्राब्दी ईसा पूर्व में भारत में नगरों के पुनः विकास की प्रक्रिया को द्वितीय नगरीकरण कहा जाता है। यह मुख्यतः गंगा के मैदानों से शुरू हुआ और पूरे भारत में फैल गया।

प्रश्न 2. जनपद क्या थे?

उत्तर: जनपद ऐसे क्षेत्र थे जहाँ किसी विशेष जन या समुदाय के लोग रहते थे। प्रत्येक जनपद का शासन एक राजा द्वारा किया जाता था।

प्रश्न 3. महाजनपद क्या थे?

उत्तर: जब कई छोटे जनपद मिलकर बड़े और शक्तिशाली राज्य बने, तो उन्हें महाजनपद कहा गया। लगभग 8वीं–7वीं शताब्दी ईसा पूर्व में इनका विकास हुआ। उस समय कुल 16 महाजनपद थे।

प्रश्न 4. 16 महाजनपदों में से चार प्रमुख महाजनपद कौन-कौन से थे?

उत्तर: मगध, कोसल, वत्स और अवंति प्रमुख और शक्तिशाली महाजनपद थे।

प्रश्न 5. अधिकांश महाजनपद गंगा के मैदान में ही क्यों विकसित हुए?

उत्तर: गंगा का मैदान अत्यंत उपजाऊ था, जिससे कृषि का विकास हुआ। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में लौह धातु उपलब्ध थी और व्यापारिक मार्ग भी विकसित हो रहे थे। इसलिए अधिकांश महाजनपद गंगा के मैदान में विकसित हुए।

प्रश्न 6. सभा और समिति क्या थीं? इनका क्या महत्व था?

उत्तर: सभा और समिति जनपदों की परिषदें थीं, जिनमें महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाती थी। सभा और समिति शासक को सलाह देती थीं तथा महत्वपूर्ण निर्णयों में भाग लेती थीं। इससे शासन अधिक व्यवस्थित और उत्तरदायी बनता था।

प्रश्न 7. एक आदर्श राजा से क्या अपेक्षा की जाती थी?

उत्तर: आदर्श राजा मंत्रियों, अधिकारियों तथा सभा-समिति से परामर्श लेकर निर्णय करता था और प्रजा के हित में शासन चलाता था।

प्रश्न 8. गणतांत्रिक महाजनपद कौन-कौन से थे?

उत्तर: वज्जि और मल्ल महाजनपद गणतांत्रिक प्रणाली पर आधारित थे। इन्हें प्रारंभिक गणराज्य कहा जाता है। यहाँ महत्वपूर्ण निर्णय सभा द्वारा लिए जाते थे तथा राजा का चयन भी सभा करती थी।

प्रश्न 09. लौह धातु (Iron) का महत्व क्या था?

उत्तर: लोहे के औजारों से कृषि का विस्तार हुआ और लोहे के हथियारों से सेनाएँ अधिक शक्तिशाली बनीं। इससे राज्यों और नगरों का विकास हुआ।

प्रश्न 10. आहत सिक्के क्या थे?

उत्तर: जिन सिक्कों पर प्रतीकों या चिन्हों को ठोककर अंकित किया जाता था, उन्हें आहत सिक्के कहा जाता था। प्रारंभिक चाँदी के सिक्कों पर प्रतीकों को ठोककर अंकित किया जाता था।

प्रश्न 11. जाति क्या थी?

उत्तर: जाति एक ऐसा सामाजिक समूह था जिसके सदस्य किसी विशेष व्यवसाय या पेशे से जुड़े होते थे और यह कौशल पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता था।

प्रश्न 14. वर्ण व्यवस्था में कितने वर्ण थे? उनके मुख्य कार्य क्या थे?

उत्तर: वर्ण व्यवस्था में चार वर्ण थे— ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र।

  • ब्राह्मणों का मुख्य कार्य ज्ञान का संरक्षण करना, शिक्षा देना तथा धार्मिक कार्य करना था।
  • क्षत्रियों का मुख्य कार्य समाज और राज्य की रक्षा करना तथा आवश्यकता पड़ने पर युद्ध करना था।
  • वैश्यों का मुख्य कार्य व्यापार, व्यवसाय और कृषि के माध्यम से समाज की समृद्धि बढ़ाना था।
  • शूद्रों का मुख्य कार्य शिल्पकला, निर्माण कार्य और अन्य सेवाएँ प्रदान करना था।

प्रश्न 15. उत्तरापथ और दक्षिणापथ क्या थे?

उत्तर: ये प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण व्यापारिक और संपर्क मार्ग थे, जो भारत के विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़ते थे। इनके माध्यम से व्यापार, यात्रा, विचारों और संस्कृतियों का आदान-प्रदान होता था।

प्रश्न 16. दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्यों के नाम बताइए।

उत्तर: चोल, चेर और पांड्य दक्षिण भारत के तीन प्रमुख राज्य थे।

प्रश्न 17. महाजनपदों का अंत कब हुआ?

उत्तर: लगभग 300 ईसा पूर्व तक महाजनपदों का अस्तित्व समाप्त हो गया और उनके स्थान पर नए राज्य एवं साम्राज्य उभरने लगे।

NCERT आधारित प्रश्न और क्रियाकलाप

प्रश्न 1. अध्याय के आरंभ में दिए गए उद्धरण पर विचार करें और समूह में चर्चा करें। अपने निरीक्षणों तथा निष्कर्षों की तुलना करें कि कौटिल्य ने एक राज्य के लिए क्या अनुशंसा की थी? क्या यह आज की परिस्थिति से भिन्न है?

उत्तर: कौटिल्य ने राज्य के लिए मजबूत राजधानी, सुरक्षित सीमाएँ, किलेबंदी, उपजाऊ भूमि, जल के पर्याप्त स्रोत, अच्छी सड़कें, व्यापार की सुविधाएँ तथा समृद्ध अर्थव्यवस्था की अनुशंसा की थी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में वन, खनिज, पशुधन और कृषि की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए।

आज भी किसी देश या राज्य के विकास के लिए सुरक्षा, परिवहन, जल, कृषि, उद्योग और व्यापार आवश्यक हैं। इसलिए कौटिल्य के अधिकांश विचार आज भी प्रासंगिक हैं। अंतर केवल इतना है कि आज आधुनिक तकनीक और लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 2. पाठ के अनुसार प्रारंभिक वैदिक समाज में शासकों का चयन कैसे किया जाता था?

उत्तर: प्रारंभिक वैदिक समाज में राजा को पूर्ण स्वतंत्रता नहीं होती थी। उसके निर्णयों में सभा और समिति की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। ये संस्थाएँ राजा को सलाह देती थीं और आवश्यकता पड़ने पर अयोग्य राजा को पद से भी हटा सकती थीं। इस प्रकार शासन में जनता के प्रतिनिधियों की भागीदारी रहती थी।

प्रश्न 3. कल्पना कीजिए कि आप प्राचीन भारत के इतिहास का अध्ययन करने वाले एक इतिहासकार हैं। महाजनपदों के विषय में अधिक जानकारी हेतु आप कौन-कौन से स्रोतों (पुरातात्त्विक, साहित्यिक इत्यादि) का उपयोग करेंगे? प्रत्येक स्रोत से आपको क्या जानकारी प्राप्त हो सकती है, वर्णन करें।

उत्तर: महाजनपदों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए मैं निम्नलिखित स्रोतों का उपयोग करूँगा—

(क) पुरातात्त्विक स्रोत :

  • नगरों के अवशेष
  • किले और परिखाएँ
  • भवनों के अवशेष
  • सिक्के और उपकरण

इनसे प्राप्त जानकारी :

  • नगरों की संरचना
  • लोगों के रहन-सहन
  • व्यापार और उद्योग
  • शासन एवं सुरक्षा व्यवस्था

(ख) साहित्यिक स्रोत :

  • उत्तर वैदिक साहित्य
  • बौद्ध साहित्य
  • जैन साहित्य
  • अर्थशास्त्र जैसे ग्रंथ

इनसे प्राप्त जानकारी :

  • महाजनपदों के नाम
  • शासकों की जानकारी
  • सामाजिक और धार्मिक जीवन
  • प्रशासन और राजनीतिक व्यवस्था

(ग) अभिलेख और सिक्के :

  • शासकों के नाम
  • व्यापारिक गतिविधियाँ
  • आर्थिक स्थिति

प्रश्न 4. प्रथम सहस्राब्दी सा.सं.पू. (BCE) में नगरीकरण हेतु लौह धातु-विज्ञान का विकास इतना महत्वपूर्ण क्यों था? उत्तर देने हेतु आप पाठ में दिए गए तथ्यों के साथ-साथ अपनी जानकारी या कल्पना का भी उपयोग कर सकते हैं।

उत्तर: प्रथम सहस्राब्दी ईसा पूर्व में लौह धातु-विज्ञान का विकास नगरीकरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था।

  • लोहे के औजारों से खेती अधिक प्रभावी हुई।
  • जंगलों को साफ करके नई भूमि कृषि योग्य बनाई गई।
  • कृषि उत्पादन बढ़ा, जिससे अधिक लोगों का भरण-पोषण संभव हुआ।
  • लोहे के हथियार कांस्य के हथियारों की तुलना में अधिक मजबूत और प्रभावशाली थे।
  • इससे राज्यों की सैन्य शक्ति बढ़ी।
  • लोहे के उपकरणों से भवन, सड़कें और अन्य निर्माण कार्य आसान हुए।
  • व्यापार और उद्योग का विकास हुआ।

इस प्रकार लौह तकनीक ने कृषि, व्यापार, युद्ध और नगर निर्माण को बढ़ावा दिया, जिसके कारण नए नगरों और महाजनपदों का विकास संभव हुआ।

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न: (“आइए विचार करें”, “आइए पता लगाएँ” और “इसे अनदेखा न करें”)

प्रश्न 1. महाजनपदों की राजधानियों को किलों से क्यों घेरा जाता था?

उत्तर: राजधानियों की सुरक्षा के लिए उनके चारों ओर मजबूत किले और गहरी खाइयाँ (परिखाएँ) बनाई जाती थीं। इससे शत्रुओं के आक्रमण से नगर की रक्षा होती थी।

प्रश्न 2. प्राचीन नगरों के प्रवेश द्वार संकरे क्यों बनाए जाते थे?

उत्तर: संकरे द्वारों के कारण नगर में आने-जाने वाले लोगों और सामान पर आसानी से निगरानी रखी जा सकती थी तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रहती थी।

प्रश्न 3. गणतांत्रिक शासन प्रणाली क्या थी?

उत्तर: गणतांत्रिक शासन प्रणाली में महत्वपूर्ण निर्णय सभा द्वारा लिए जाते थे और राजा का चयन भी सभा करती थी। वज्जि और मल्ल ऐसे महाजनपद थे जहाँ गणतांत्रिक शासन व्यवस्था थी।

प्रश्न 4. भारत में सिक्कों का प्रयोग क्यों शुरू हुआ?

उत्तर: व्यापार बढ़ने के कारण वस्तुओं के आदान-प्रदान को आसान बनाने के लिए सिक्कों का प्रयोग शुरू किया गया।

प्रश्न 5. एक विकसित समाज अपने आप को विभिन्न समूहों में क्यों विभाजित करता है?

उत्तर: समाज में अलग-अलग कार्यों को व्यवस्थित रूप से करने के लिए लोग विभिन्न समूहों में बँट जाते हैं। इससे कार्यों का विभाजन होता है और समाज का संचालन आसान हो जाता है।

प्रश्न 6. समाज में समानता क्यों आवश्यक है?

उत्तर: समानता से सभी लोगों को सम्मान और अवसर मिलते हैं। इससे भेदभाव कम होता है और समाज में शांति तथा सहयोग बना रहता है।

प्रश्न 7. ‘कास्ट’ (Caste) शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर: ‘कास्ट’ शब्द पुर्तगाली भाषा के शब्द ‘कास्टा’ से बना है। इसका उपयोग भारतीय समाज की जाति और वर्ण व्यवस्था को समझाने के लिए किया गया था।

प्रश्न 8. क्या प्राचीन काल में लोग अपना व्यवसाय बदल सकते थे?

उत्तर: हाँ, प्राचीन काल में लोग परिस्थितियों के अनुसार अपना व्यवसाय बदल सकते थे। उदाहरण के लिए अकाल या अन्य कठिनाइयों के कारण लोग नया काम अपना लेते थे।

प्रश्न 9. शिशुपालगढ़ नगर की विशेषताएँ क्या थीं?

उत्तर: शिशुपालगढ़ एक सुनियोजित नगर था। इसमें मजबूत किले, चौड़ी सड़कें और सुरक्षा के लिए परिखाएँ (खाइयां) बनी हुई थीं।

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