कब, कहाँ और कैसे? (WHERE, HOW AND WHEN?) – CTET Paper 2 SST

कब, कहाँ और कैसे? (WHERE, HOW AND WHEN?) – CTET Paper 2 Social Science 



अतीत में लोग कहाँ रहते थे?

  • कई लाख वर्ष पहले से लोग नर्मदा नदी के तट पर रह रहे हैं। 

  • यहाँ रहने वाले आरंभिक लोगों में से कुछ कुशल संग्राहक (Skilled Gatherers) थे जो अपने भोजन के लिए जड़ों, फलों तथा जंगल के अन्य उत्पादों का संग्रह किया करते थे। 

  • वे जानवरों का आखेट (Hunting) भी करते थे।


  • उत्तर-पश्चिम की सुलेमान और किरथर पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 8000 वर्ष पूर्व स्त्री-पुरुषों ने सबसे पहले गेहूँ (Wheat) तथा जौ (Barley) जैसी फ़सलों को उपजाना आरंभ किया। (मेहरगढ़, पाकिस्तान)

  • उन्होंने भेड़, बकरी और गाय-बैल जैसे पशुओं को पालतू बनाना शुरू किया। ये लोग गाँवों में रहते थे। 


  • उत्तर-पूर्व (North-East) में गारो तथा मध्य भारत (Central India) में विंध्य पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि का विकास हुआ। 

  • जहाँ सबसे पहले चावल (Rice) उपजाया गया वे स्थान विंध्य के उत्तर मेें स्थित थे। (कोलडिहवा, प्रयागराज)

  • लगभग 4700 वर्ष पूर्व सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे कुछ आरंभिक नगर (earliest cities) फले-फूले। 

  • गंगा व इसकी सहायक नदियों के किनारे तथा समुद्र तटवर्त्ती इलाकों में नगरों का विकास लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ।


  • गंगा के दक्षिण में इसकी सहायक सोन नदी के आस-पास का क्षेत्र प्राचीन काल में ‘मगध’ (वर्तमान बिहार में) नाम से जाना जाता था। इसके शासक बहुत शक्तिशाली थे और उन्होंने एक विशाल राज्य स्थापित किया था।



देश का नाम:

  • अपने देश के लिए हम प्रायः इण्डिया तथा भारत जैसे नामों का प्रयोग करते हैं। 

  • इण्डिया शब्द इण्डस (Indus) से निकला है, जिसे संस्कृत में सिंधु कहा जाता है। 

  • लगभग 2500 वर्ष पूर्व उत्तर-पश्चिम (ईरान और यूनान) की ओर से आने वाले ईरानियों और यूनानियों ने सिंधु को हिंदोस (Hindos) अथवा इंदोस (Indos) और सिंधु नदी के पूर्व में स्थित भूमि प्रदेश को इण्डिया कहा। 

  • भरत नाम का प्रयोग उत्तर-पश्चिम में रहने वाले लोगों के एक समूह के लिए किया जाता था। इस समूह का उल्लेख संस्कृत की आरंभिक कृति (लगभग 3500 वर्ष पुरानी) ऋग्वेद में भी मिलता है। बाद में इसका प्रयोग भारत देश के लिए होने लगा।


अतीत के बारे में कैसे जानें?

  • अतीत की जानकारी हम कई तरह से प्राप्त कर सकते हैं।

  • पाण्डुलिपि (Manuscript) — अतीत में हाथ से लिखी गई पुस्तकों को पाण्डुलिपि कहा जाता है।

  • अंग्रेज़ी में ‘पाण्डुलिपि’ के लिए प्रयुक्त होने वाला ‘मैन्यूस्क्रिप्ट’ शब्द लैटिन शब्द ‘मेनू’ से बना है, जिसका अर्थ हाथ होता है। 

  • पाण्डुलिपियाँ प्रायः ताड़पत्रों (Palm leaf) अथवा हिमालय क्षेत्र में उगने वाले भूर्ज (birch) नामक पेड़ की छाल (bark of tree) से विशेष तरीके से तैयार भोजपत्र पर लिखी मिलती हैं।

  • प्रायः ये पाण्डुलिपियाँ मंदिरों और विहारों में प्राप्त होती हैं। इन पुस्तकों में धार्मिक मान्यताओं व व्यवहारों, राजाओं के जीवन, औषधियों तथा विज्ञान आदि सभी प्रकार के विषयों की चर्चा मिलती है।


  • इनके अतिरिक्त हमारे यहाँ महाकाव्य, कविताएँ तथा नाटक भी हैं। इनमें से कई संस्कृत में लिखे हुए मिलते हैं जबकि अन्य प्राकृत और तमिल भाषा में हैं। 

  • प्राकृत भाषा का प्रयोग आम लोग करते थे।

  • अभिलेख (Inscriptions) — अभिलेख पत्थर अथवा धातु जैसी अपेक्षाकृत कठोर सतहों पर उत्कीर्ण किए गए मिलते हैं।

  • सम्राट अशोक का लगभग 2250 वर्ष पुराना एक अभिलेख वर्तमान अफ़गानिस्तान के कंधार से प्राप्त हुआ है। इस अभिलेख में यूनानी तथा अरामेइक नामक दो भिन्न लिपियों (Scripts) का प्रयोग किया गया है।

  • पुरातत्त्वविद् (Archaeologist) — अतीत की वस्तुओं का अध्ययन करने वाला व्यक्ति पुरातत्त्वविद् कहलाता है।

  • पुरातत्त्वविद् पत्थर और ईंट से बनी इमारतों के अवशेषों, चित्रों तथा मूर्तियों का अध्ययन करते हैं। 


  • वे औज़ारों, हथियारों, बर्तनों, आभूषणों तथा सिक्कों की प्राप्ति के लिए छान-बीन तथा खुदाई (explore and excavate) भी करते हैं।

  • पुरातत्त्वविद् जानवरों, चिड़ियों तथा मछलियों की हड्डियाँ भी ढूँढ़ते हैं। इससे उन्हें यह जानने में भी मदद मिलती है कि अतीत में लोग क्या खाते थे। 

  • यदि अन्न के दाने अथवा लकड़ी के टुकड़े जल जाते हैं तो वे जले हुए रूप (Charred form) में बचे रहते हैं।

  • इतिहासकार (Historian) — इतिहासकार उन्हें कहते हैं जो अतीत का अध्ययन करते हैं। 

  • पुरातत्त्वविदों द्वारा प्राप्त स्रोतों की सहायता से इतिहासकार धीरे-धीरे अतीत का पुनर्निर्माण करते जाते हैं।


  • अतीत में पशुपालकों अथवा कृषकों का जीवन राजाओं तथा रानियों के जीवन से तथा व्यापारियों का जीवन शिल्पकारों के जीवन से बहुत भिन्न था।

  • उस समय शासक अपनी विजयों का लेखा-जोखा रखते थे। जबकि शिकारी, मछुआरे, संग्राहक, कृषक अथवा पशुपालक जैसे आम आदमी प्रायः अपने कार्यों का लेखा-जोखा नहीं रखते थे।



इतिहास और तिथियाँ:

  • वर्तमान समय में वर्ष की गणना ईसाई धर्म-प्रवर्तक ईसा मसीह के जन्म की तिथि से की जाती है। 

  • अतः 2023 वर्ष कहने का तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म के 2023 वर्ष के बाद से है।

  • भारत में तिथियों के इस रूप का प्रयोग लगभग दो सौ वर्ष पूर्व आरंभ हुआ था।

  • B.C. (हिंदी में ई.पू.) का तात्पर्य ‘Before Christ’ (ईसा पूर्व) होता है। इसका तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म के वर्ष  के पूर्व से है।

  • A.D. (हिंदी में ई.) का तात्पर्य ‘एनो डॉमिनी’ होता है। यह दो लैटिन शब्दों से बना है तथा इसका तात्पर्य ईसा मसीह के जन्म के वर्ष से है।

  • कभी-कभी A.D. की जगह C.E. (Common Era) तथा B.C. की जगह B.C.E. (Before Common Era) का प्रयोग होता है।

  • कभी-कभी अंग्रेज़ी के B.P. अक्षरों का प्रयोग होता है जिसका तात्पर्य ‘Before Present’ (वर्तमान से पहले) है।

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