विकास (Development) Class 10 Economics Chapter 01 Notes in Hindi

Chapter 01 : विकास (Development)


विकास (Development) : 

विकास एक व्यापक शब्द है जिसमे व्यक्ति की आय का बढ़ना, जीवन स्तर का बढ़ना, भौतिक और अभौतिक वस्तुओं की जरूरतों का अध्ययन किया जाता है।


आय के अतिरिक्त अन्य कारक जो हमारे जीवन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

आय के अतिरिक्त बेहतर जीवन के लिए परिवार, रोज़गार, मित्रता, सुरक्षा व समानता की भावना, शांतिपूर्ण माहौल आदि भी महत्त्वपूर्ण है। क्योंकि मुद्रा से केवल भौतिक वस्तुएँ ही खरीदी जा सकती हैं।


Question – “लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न हो सकते हैं।” इस कथन की उदाहरणों सहित व्याख्या कीजिए।

Answer –

(i) प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक और सांस्कृतिक जरूरतें अलग-अलग होती है और लक्ष्य भी अलग-अलग होते हैं।

(ii) कभी-कभी दो व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह परस्पर विरोधी चीजें चाहते हैं।

(iii) उदाहरण के लिए एक लड़की अपने भाई जितनी ही आज़ादी और अवसर की उम्मीद करती है और यह उम्मीद करती है कि उसका भाई घर के काम में भी भागीदारी करें। लेकिन यह बात शायद उसके भाई को पसंद नहीं आए।

(iv) जो एक के लिए विकास हो सकता है, वह दूसरों के लिए विनाश हो सकता है।

(v) उदाहरण के लिए उद्योगपति अधिक बिजली पाने के लिए अधिक बांध चाहते है। बांध क्षेत्र के आसपास वाले गांव के लोग इसका विरोध करते हैं।

(vi) जल निकायों के आसपास रहने वाले लोग जैसे आदिवासी, अपनी भूमि की सिंचाई के लिए छोटे चक, बांध या तालाब को शायद वरीयता देगें।

एक देश की आय क्या है?

किसी देश की आय उस देश के सभी निवासियों की आय है। इससे हमें देश की कुल आय ज्ञात होती है।

देशों के मध्य विकास को मापने वाले कारक:

  • देशों की तुलना करने के लिए उनकी आय सबसे महत्त्वपूर्ण विशिष्टता समझी जाती है।
  • देशों के मध्य विकास को मापने के लिए औसत आय के साथ-साथ सार्वजनिक सुविधाओं (Public Facilities) की उपलब्धता, स्वास्थ्य सेवाएँ, जन्म व मृत्यु दर, जीवन प्रत्याशा, प्रदूषण मुक्त वातावरण आदि मानकों का भी प्रयोग किया जाता है।

देश की औसत आय (Average Income) की गणना डॉलर में क्यों की जाती है:

प्रत्येक देश के लिए औसत आय की गणना, अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा डॉलर में की जाती है क्योंकि डॉलर मानक अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा है। इससे विभिन्न देशों के मध्य तुलना करने में आसानी होती है।


प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) :

  • प्रति व्यक्ति आय किसी देश में प्रत्येक व्यक्ति द्वारा अर्जित आय की मात्रा का माप है।
  • औसत आय को प्रति व्यक्ति आय भी कहा जाता है।
  • जब देश की राष्ट्रीय आय को उस देश की कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है तो प्रति व्यक्ति आय प्राप्त होती है।
  • प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय / कुल जनसंख्या
  • भारत मध्य आय वर्ग के देशों में आता है क्योंकि उसकी प्रतिव्यक्ति आय 2019 में केवल USD $6700 प्रति वर्ष थी।


शिशु मृत्यु दर (Infant mortality rate) :

किसी वर्ष में पैदा हुए 1,000 जीवित बच्चों में से एक वर्ष की आयु से पहले मर जाने वाले बच्चों का अनुपात।

साक्षरता दर (Literacy rate) :

7 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में साक्षर जनसंख्या का अनुपात।

निवल उपस्थिति अनुपात (Net Attendance Ratio) :

14 तथा 15 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले कुल बच्चों का उस आयु वर्ग के कुल बच्चों के साथ अनुपात।


एक विकासशील (Developing) और विकसित (Developed) देश की मुख्य विशेषताएँ:

विकसित देश (Developed) —

  • नई तकनीक व विकसित उद्योग।
  • उच्च स्तरीय रहन सहन।
  • उच्च प्रति व्यक्ति आय।
  • उच्च साक्षरता दर।
  • लोगों की स्वास्थ्य स्थिति बेहतर (जन्मदर, मृत्यु दर पर नियंत्रण)

विकासशील देश (Developing) —

  • औद्योगिक रूप से पिछड़े हुए।
  • निम्न प्रति व्यक्ति आय।
  • निम्न साक्षरता दर।
  • सामान्य रहन सहन।
  • बेहतर स्वास्थ्य का अभाव (अधिक मृत्यु दर)

बी.एम.आई. (Body Mass Index) :

शरीर का द्रव्यमान सूचकांक से किसी व्यस्क के अल्पपोषित होने की जाँच कर सकते हैं। यदि यह 18.5 से कम है तो व्यक्ति कुपोषित है अगर 25 से ऊपर है तो वह मोटापे से ग्रस्त हैं।

BMI = भार (kg) / ऊंचाई का वर्ग (m)

मानव विकास सूचकांक (Human Development Index - HDI) :

  • इसके आधार पर किसी देश को उसकी गुणवत्ता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। 
  • यह विभिन्न देशों में विकास के स्तर का मूल्यांकन करने का मापदंड है। 
  • यह संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) नामक संस्था जारी किया जाता है।
  • इसमें देशों की तुलना लोगों के शैक्षिक स्तर, स्वास्थ्य स्थिति और प्रति व्यक्ति आय के आधार पर होती है।


विकास की धारणीयता (Sustainability of Development) :

विकास की धारणीयता से अभिप्राय है कि पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना विकास करना तथा वर्तमान पीढ़ियों की जरूरतों के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों की जरूरतों को ध्यान में रखना।


विकास की धारणीयता की विशेषताए :

  • संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग।
  • नवीकरणीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग।
  • वैकल्पिक संसाधनों को ढूँढने में मदद।
  • संसाधनों के पुनः उपयोग व चक्रीय प्रक्रिया को बढ़ावा।


नवीकरणीय संसाधन (Renewable resources):

  • नवीकरणीय संसाधन वे प्राकृतिक संसाधन होते हैं जो प्रकृति द्वारा पुनः उत्पन्न किए जा सकते हैं और जिनका उपयोग करने पर ये समाप्त नहीं होते या बहुत जल्दी पुनः उपलब्ध हो जाते हैं।
  • ये पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत कम हानिकारक होते हैं।
  • ये दीर्घकालिक रूप से सतत विकास में सहायक होते हैं।
  • जैसे; सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, जैविक ईंधन, भू-तापीय ऊर्जा।


गैर-नवीकरणीय संसाधन (Non-Renewable resources) :

गैर नवीकरणीय साधन वो हैं, जो कुछ ही वर्षों के प्रयोग के पश्चात् समाप्त हो जाते हैं। इन संसाधनों का धरती पर एक निश्चित भण्डार है और इनकी पुनः पूर्ति नहीं हो सकती। जैसे; कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि।

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