संविधान निर्माण - Class 09 Civics Ch 02 Notes in Hindi (Constitution Making)

Class 09 Political Science Chapter 02 Notes in Hindi

संविधान निर्माण (Constitutional Design)


संविधान (Constitution):

  • संविधान लिखित नियमों तथा कानूनों का एक ऐसा दस्तावेज है जिससे किसी देश की शासन व्यवस्था चलती है। 
  • संविधान को देश की सरकार और सभी नागरिक सामूहिक रूप से मानते है। 
  • संविधान किसी देश का सर्वोच्च कानून होता है।


रंगभेद (Apartheid):

  • रंगभेद एक ऐसी बुरी व्यवस्था थी जिसमें लोगों से उनके त्वचा के रंग के आधार पर भेदभाव किया जाता था। 


रंगभेद की नीति के अंतर्गत अश्वेतों पर प्रतिबंध:

  • गोरो की बस्तियों में बसने की इजाजत नहीं थी।
  • परमिट होने पर ही गोरो की बस्तियों में काम करने जा सकते थे।
  • काले लोग गोरों के लिए आरक्षित स्थानों पर नहीं जा सकते थे। इसमें गोरों के गिरजाघर भी सम्मिलित थे।
  • अश्वेतों को संगठन बनाने और इस भेदभावपूर्ण व्यवहार का विरोध करने का भी अधिकार नहीं था।


दक्षिण अफ्रीका का स्वतंत्रता संग्राम:

  • अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के झंडे तले दक्षिण अफ्रीकियों ने 1950 से ही गोरों के विरुद्ध आजादी की लड़ाई लड़ी।
  • दक्षिण अफ्रीकी नेता नेल्सन मंडेला ने रंगभेद से चलने वाली शासन की व्यवस्था के विरुद्ध आवाज उठाई ।
  • नेल्सन मंडेला पर देशद्रोह के आधार पर मुकदमा चलाया गया ।
  • नेल्सन मंडेला को 7 अन्य नेताओं सहित 1964 में देश में रंगभेद से चलने वाली शासन व्यवस्था का विरोध करने के लिए आजीवन कारावास की सजा दी गई।
  • वह 28 वर्षों तक दक्षिण अफ्रीका की सबसे भयावह जेल, रोब्बेन द्वीप की जेल में रहे ।
  • आखिरकार 26 अप्रैल 1994 को दक्षिण अफ्रीका गणराज्य का नया झंडा लहराया और यह एक लोकतांत्रिक देश बन गया।
  • नेल्सन मंडेला ने अपनी आत्मकथा लिखी जिसका नाम ‘द लांग वॉक टू फ्रीडम’ है।


संविधान की आवश्यकता:

  • लोकतान्त्रिक सरकार का निर्माण और उसके कार्य तय करने के लिए।
  • सरकार के विभिन्न अंगो के अधिकार क्षेत्र तय करने के लिए।
  • सरकार को अपनी शक्तियों के दुरूपयोग से रोकने के लिए।
  • नागरिकों के अधिकार सुरक्षित करने के लिए।
  • अच्छे समाज के गठन के लिए।


संविधान के प्रमुख कार्य:

  • एकसाथ रह रहे विभिन्न तरह के लोगों के बीच जरूरी भरोसा और सहयोग विकसित करना।
  • स्पष्ट करना की सरकार का गठन कैसे होगा और किसे फैसले लेने का अधिकार होगा।
  • सरकार के अधिकारों की सीमा तय करना और नागरिकों के अधिकार बताना।
  • अच्छे समाज के गठन के लिए लोगों की आकांक्षाओं को व्यक्त करना।


भारतीय संविधान का निर्माण:

  • 1928 में मोतीलाल नेहरू और कांग्रेस के 8 अन्य नेताओं ने भारत का एक संविधान लिखा था।
  • 1931 में कराची में हुये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में प्रस्ताव ये भी रखा गया कि आजाद भारत का संविधान कैसा होगा।
  • इन दोनों ही दस्तावेजों में स्वतंत्र भारत के संविधान में सार्वभौम वयस्क मताधिकार, स्वतन्त्रता और समानता का अधिकार और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात भी कही गयी थी।
  • इस तरह से भारतीय संविधान की नींव रखी गई थी।
  • 1935 के भारत सरकार अधिनियम से कुछ पुराने नियमों और संस्थाओं को ज्यों का त्यों या थोड़े बहुत बदलाव के साथ अपनाया गया, क्योंकि वे पहले से ही काम कर रही थीं और लोगों को उनका अनुभव था।
  • इसके अलावा संविधान निर्माता ने अलग-अलग देशों के महत्वपूर्ण विचारों और अनुभवों को अपनी जरूरत के अनुसार भारतीय संविधान में शामिल किया।


संविधान सभा:

  • चुने गए जनप्रतिनिधियों की जो सभा संविधान को लिखने का काम करती है उसे संविधान सभा कहते हैं।
  • भारतीय संविधान सभा के लिए जुलाई 1946 में चुनाव हुए थे।
  • संविधान सभा की पहली बैठक दिसंबर 1946 को हुई थी।
  • संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद थे।
  • भारत का संविधान लिखने वाली सभा में 299 सदस्य थे। जिन्होंने 26 नवम्बर 1949 संविधान लिखने का कार्य पूरा कर लिया।
  • प्रारूप कमेटी के अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर ने चर्चा के लिए एक प्रारूप संविधान बनाया।
  • 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ इसीलिए इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।


भारतीय संविधान की विशेषताएँ:

  • संघीय सरकार
  • संसदात्मक सरकार
  • प्रभुत्व संपन्न लोकतान्त्रिक राज्य
  • पंथ निरपेक्ष राज्य
  • मूल अधिकार
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका
  • राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत


संविधान संशोधन:

  • देश के सर्वोच्च विधायी संस्था द्वारा उस देश के संविधान में किए जाने वाले बदलाव को संविधान संशोधन कहते है।


संविधान का दर्शन:

  • प्रस्तावना : संविधान की शुरुआत बुनियादी मूल्यों की एक छोटी सी उद्देशिका के साथ होती है। इसे संविधान की प्रस्तावना या उद्देशिका कहते हैं। इन मूल्यों पर पूरे संविधान का निर्माण हुआ है।
  • प्रस्तावना में भारतीय संविधान की आत्मा बसती है।
  • प्रस्तावना में 'समाजवादी' और 'पंथ निरपेक्ष' शब्दों को 42वें संविधान संशोधन, 1976 द्वारा संविधान की उद्देशिका में जोड़ा गया। 


भारतीय संविधान को दिशा देने वाले शब्द:

  • हम भारत के लोग, भारत को: भारत के संविधान का निर्माण और अधिनियमन भारत के लोगों ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से किया है।
  • समाजवादी: सरकार का काम संसाधनों का समान वितरण सुनिश्चित करना है।
  • प्रभुत्व-संपन्न: लोगों को अपने से जुड़े हर मामले में फैसला करने का सर्वोच्च अधिकार है। कोई भी बाहरी शक्ति भारत की सरकार को आदेश नहीं दे सकती।
  • पंथ निरपेक्ष: नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने की पूरी स्वतंत्रता है, लेकिन कोई धर्म अधिकारिक नहीं।
  • लोकतंत्रात्मक: सरकार का एक ऐसा स्वरूप जिसमें लोगों को समान राजनैतिक अधिकार प्राप्त रहते हैं।
  • गणराज्य: शासन का प्रमुख लोगों द्वारा चुना हुआ व्यक्ति होगा।
  • न्याय: नागरिकों के साथ उनकी जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता।
  • स्वतंत्रता: नागरिकों को उनके विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होगी।
  • समता: कानून के समक्ष सभी लोग बराबर हैं। हर नागरिक को समान अवसर उपलब्ध होगा।
  • बंधुता: हम सब ऐसा आचरण करें जैसे कि एक परिवार के सदस्य हों। कोई भी नागरिक किसी दूसरे नागरिक को अपने से कमतर न माने।


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