यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय - Class 10 NCERT History Chapter 1 Notes & Question Answer

Ch.01 यूरोप में राष्ट्रवाद का उदय (Rise of Nationalism in Europe)


राष्ट्र —

अरनेस्ट रेनर के अनुसार एक राष्ट्र लंबे प्रयासों, त्याग और निष्ठा का चरम बिंदु होता है। राष्ट्र ऐसे लोगों का समूह है जो जाति, धर्म, भाषा, रीति-रिवाज, इतिहास आदि के कारण आपस में जुड़े हुए है, जिनके अंदर मनोवैज्ञानिक सद्भाव की भावना विकसित हुई है।

राष्ट्रवाद —

अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना को राष्ट्रवाद कहते हैं। राष्ट्रवाद (nationalism) यह विश्वास है कि लोगों का एक समूह इतिहास, परंपरा, भाषा, जातीयता और संस्कृति के आधार पर स्वयं को एकीकृत करता है।

फ्रांसीसी लोगों में सामूहिक पहचान की भावना का विकास किस प्रकार हुआ?

फ्रांसीसी क्रांति से आए बदलाव :
  • राष्ट्रवाद की पहली स्पष्ट अभिव्यक्ति 1789 में फ्रांसीसी क्रांति के साथ हुई। 
  • फ्रांसीसी क्रांति के फलस्वरूप प्रभुसत्ता राजतंत्र से निकल कर फ़्रांसीसी नागरिकों के हाथों में आ गई।
  • एक नया फ्रांसीसी तिरंगा झंडा चुना गया। यह लाल, सफेद और नीले रंग का था।
  • पितृभूमि (la patrie) और नागरिक (le citoyen) जैसे विचारों पर बल दिया गया।
  • इस्टेट जनरल का नाम बदलकर नेशनल असेंबली कर दिया गया। नेशनल असेंबली का चुनाव सक्रिय नागरिकों द्वारा किया जाने लगा।
  • राष्ट्र के नाम पर नई स्तुतियां रची गई, शपथें ली गईं, शहीदों का गुणगान किया गया।
  • एक संविधान के अंतर्गत सभी को समान अवसर और अधिकार प्रदान किए गए।
  • एक केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई जिसने अपने भू-भाग में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाए।
  • आंतरिक आयात-निर्यात शुल्क समाप्त कर दिया गया और भार तथा नापने की एकसमान व्यवस्था लागू की गई।
  • क्षेत्रीय बोलियों को खत्म किया गया तथा फ्रेंच को राष्ट्रभाषा बनाया गया।

नेपोलियन की नागरिक संहिता (1804) —

  • जन्म पर आधारित विशेष अधिकारों को समाप्त कर दिया।
  • कानून के समक्ष बराबरी और संपत्ति के अधिकार को सुरक्षा बनाया।
  • सामंती व्यवस्था को खत्म किया और किसानों को भू-दासत्व और जमीदारी शुल्क से मुक्ति दिलाई।
  • यातायात और संचार व्यवस्था को सुधारा गया।
  • शहरों में कारीगरों के श्रेणी संघों के नियंत्रण को हटा दिया।

नेपोलियन शासन की सीमाएं —

  • कर बढ़ा दिया गया।
  • सेंसरशिप लगा दी गई।
  • लोगों को जबरन फ्रांस की सेना में भर्ती किया जाने लगा।

राष्ट्रवाद के उदय के कारण —

  • निरंकुश शासन व्यवस्था
  • उदारवादी विचारों का प्रसार
  • स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व का नारा
  • शिक्षित मध्य वर्ग की भूमिका

उदारवाद —

उदारवाद यानि Liberalism शब्द लैटिन भाषा के मूल शब्द ‘liber’ पर आधारित है। जिसका अर्थ है आजाद। नए मध्यम वर्ग के लिए उदारवाद का अभिप्राय था — व्यक्ति के लिए आज़ादी व कानून के समक्ष समानता।

Question – 19वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में उदारवाद की विचारधारा ने यूरोप को किस प्रकार प्रभावित किया? स्पष्ट कीजिए। (2024)
Question – 19वीं सदी के शुरुआती दशकों में यूरोप में उदारवाद राष्ट्रीय एकता से किस प्रकार जुड़ा था? विश्लेषण कीजिए। (2025)

Answer – 
  • (i) 19वीं सदी के यूरोप में नए मध्यम वर्ग के लिए उदारवाद व्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में था।
  • (ii) यह कानून के समक्ष सभी की समानता का भी समर्थन करता है।
  • (iii) फ्रांसीसी क्रांति के बाद से उदारवाद ने निरंकुशता और पादरी वर्ग के विशेषाधिकारों के अंत की बात की।
  • (iv) राजनीतिक रूप से, इसने सहमति से सरकार की अवधारणा पर जोर दिया। यह एक संविधान और संसद के माध्यम से प्रतिनिधि सरकार के पक्ष में रहा।
  • (v) आर्थिक क्षेत्र में, उदारवाद बाज़ारों की स्वतंत्रता, वस्तुओं और पूंजी की आवाजाही पर लगाए गए राज्यों के प्रतिबंधों के उन्मूलन के पक्ष में था।
  • (vi) आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए ज़ोलवेरिन का गठन किया गया।
  • (vii) इसने निजी संपत्ति की अनुल्लंघनीयता पर भी जोर दिया।

जॉलवेराइन —

यह एक जर्मन शुल्क संघ था जिसमें अधिकांश जर्मन राज्य शामिल थे। यह संघ 1834 में प्रशा की पहल पर स्थापित हुआ था। यह संघ जर्मनी के आर्थिक एकीकरण का प्रतीक था। इसमें 
विभिन्न राज्यों के बीच जितने भी शुल्क अवरोध थे उसे समाप्त कर दिया गया।
मुद्राओं की संख्या दो कर दी, इससे पहले 30 से ज्यादा थी। 

ऐले (elle) – कपड़े नापने का पैमाना

रूढ़िवाद —

ऐसा राजनीतिक दर्शन जो परंपरा, स्थापित संस्थानों और रिवाजों पर जोर देता है और तेज बदलावों की बजाए क्रमिक और धीरे-धीरे विकास को प्राथमिकता देता है।
रूढ़िवादी मानते थे कि राज्य और समाज की स्थापित पारंपरिक संस्थाएँ; जैसे-राजतंत्र, चर्च, सामाजिक ऊँच-नीच, संपत्ति और परिवार को बनाए रखना चाहिए।

1815 के उपरांत यूरोप में रूढ़िवाद —

1815 में ब्रिटेन, प्रशा, रूस और ऑस्ट्रिया ने वाटरलू के युद्ध में मिलकर नेपोलियन को पराजित किया था। नेपोलियन की हार के उपरांत यूरोप की सरकारों का झुकाव पुनः रूढ़िवाद की तरफ बढ गया।
इसके लिए उन्होंने नेपोलियन के समय जितने भी बदलाव हुए थे उन सब को खत्म कर दिया। 
जिसके लिए एक समझौता किया गया। जिसका नाम था– वियना समझौता या वियना संधि

वियना संधि 1815 —

1815 में ब्रिटेन, प्रशा, रूस और ऑस्ट्रिया जैसी यूरोपीय शक्तियों के प्रतिनिधि यूरोप के लिए एक समझौता तैयार करने के लिए वियना में इकट्ठा हुए। जिसकी अध्यक्षता आस्ट्रिया के चांसलर ड्यूक मैटरनिख ने की।
संधि के तहत निम्नलिखित मुख्य निर्णय लिये गए —
  • फ्रांस की सीमाओं पर कई राज्य कायम कर दिए गये ताकि भविष्य में फ्रांस अपना विस्तार ना कर सके। 
  • फ्रांसीसी क्रांति के दौरान हटाए गए बूर्बों राजवंश को सत्ता में बहाल किया गया।
  • नेपोलियन द्वारा बर्खास्त किए गए सभी राजतंत्रों को बहाल किया गया।
  • इसका मुख्य उद्देश्य यूरोप में एक नई रूढ़िवादी व्यवस्था कायम करना था।
  • नेपोलियन के द्वारा बनाए गए 39 राज्यों के महासंघ को उसी तरह बरकरार रखा गया।

Question – "1830 का दशक यूरोप में भारी आर्थिक कठिनाई लेकर आया।" इस कथन की उदाहरणों सहित पुष्टि कीजिए। (2024, 2025)

Answer –
  • (i) उन्नीसवीं सदी के पूर्वार्द्ध में पूरे यूरोप में जनसंख्या में भारी वृद्धि देखी गई।
  • (ii) अधिकांश देशों में उपलब्ध रोजगार से ज्यादा नौकरियों चाहने वाले थे। 
  • (iii) ग्रामीण इलाकों से आबादी शहरों की ओर पलायन कर गई।
  • (iv) कस्बों में छोटे उत्पादकों को अक्सर इंग्लैंड से सस्ते मशीन निर्मित सामानों के आयात से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था। जहां औद्योगीकरण महाद्वीप की तुलना में अधिक उन्नत था।
  • (v) यूरोप के उन क्षेत्रों में जहां अभिजात वर्ग अभी भी सत्ता का आनंद ले रहा था। किसान सामंती कर्ज के बोझ के नीचे संघर्ष कर रहे थे।
  • (vi) खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि या एक वर्ष में खराब फसल के कारण शहर और देश में बड़े पैमाने पर गरीबी फैल गई।

यूरोप में क्रांतिकारी —

यूरोपियन सरकार के इन सारे निर्णय के विरोध में क्रांतिकारियों ने जन्म लिया। क्रांतिकारियों ने अंदर ही अंदर कुछ गुप्त संगठनों का निर्माण किया। जिनका मुख्य लक्ष्य था —
  • राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना।
  • वियना संधि की विरोध करना ।
  • स्वतंत्रता के लिए लड़ना ।

ज्यूसेपी मेत्सिनी —

  • इनका जन्म 1805 में जेनोआ में हुआ था और कुछ समय पश्चात् वह कार्बोनरी में गुप्त संगठन का सदस्य बन गया। 
  • चौबीस साल की युवावस्था में लिगुरिया में क्रांति करने के लिए उसे 1831 में देश निकाला दे दिया गया।
  • तत्पश्चात् उन्होनें दो और भूमिगत संगठनों की स्थापना की। पहला था मार्सेई में “यंग इटली” और दूसरा बर्न में “यंग यूरोप“। 
  • मेत्सिनी द्वारा राजतंत्र का जोरदार विरोध एवं उसके प्रजातांत्रिक सपनों ने रूढ़िवादियों के मन में भय भर दिया। 
  • ड्यूक मैटरनिख ने मेत्सिनी को सामाजिक व्यवस्थाओं का सबसे खतरनाक दुश्मन बताया था।

जर्मनी का एकीकरण :

  • (i) जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया 1848 के उदारवादी राष्ट्रवादी आंदोलन के साथ फ्रैंकफर्ट संसद के गठन के साथ शुरू हुई, परंतु प्रयास विफल रहे।
  • (ii) तब प्रशा के राजा ने जर्मनी के एकीकरण की जिम्मेदारी प्रमुख मंत्री आटो-वॉन बिस्मार्क को सौंपी। आटो-वॉन बिस्मार्क ने जर्मनी राष्ट्र निर्माण में मुख्य भूमिका अदा की।
  • (iii) बिस्मार्क ने ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और फ्रांस के साथ सात वर्षों की अवधि में तीन युद्धों का नेतृत्व किया जो प्रशा की जीत के साथ समाप्त हुआ।
  • (iv) अंततः जनवरी 1871 में जर्मनी एकीकृत हो गया।
  • (v) 18 जनवरी 1871 को वर्साय में आयोजित एक समारोह में प्रशा के राजा काइजर विलियम प्रथम को जर्मन सम्राट घोषित किया गया।
  • (vi) नए जर्मन राज्य में, मुद्रा, बैकिंग एवं न्यायिक व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया।

इटली का एकीकरण (1859-1870):

  • (i) इटली सात राज्यों में बँटा हुआ था।
  • (ii) 1830 के दशक में ज्यूसेपे मेत्सिनी ने यंग इटली नामक गुप्त संस्था बनाकर इटली को एकजुट करने का प्रयास किया, जो असफल रहा।
  • (iii) इसके कारण राजा विक्टर इमैनुएल द्वितीय ने युद्धों के माध्यम से इतालवी राज्यों को एकजुट करने की जिम्मेदारी ली।
  • (iv) कैमिलो दी कावूर ने फ्रांस के साथ एक चतुर कूटनीतिक संधि के माध्यम से 1859 में उत्तरी भाग में ऑस्ट्रियाई सेना को हराया।
  • (v) दक्षिणी भाग में ज्यूसेपे गैरीबाल्डी भी सैनिकों और सशस्त्र स्वयंसेवकों के साथ एकीकरण के प्रयासों में शामिल हो गया।
  • (vi) 1860 में वे स्थानीय किसानों का समर्थन हासिल करने में सफल रहे और स्पेनिश शासकों को बाहर कर दिया और इतालवी राज्यों को बूर्बों शासकों से मुक्त कराया।
  • (vii) इसके साथ ही इटली के एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई और 1861 में विक्टर इमैनुएल द्वितीय को एकीकृत इटली का राजा घोषित किया गया।

Question – “उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में यूरोप में राष्ट्रवाद की भावनाओं को जागृत करने में संस्कृति ने एक अहम भूमिका निभाई।” इस कथन की उदाहरणों सहित पुष्टि कीजिए। (2024)
Question – "19वीं शताब्दी के यूरोप में राष्ट्र के विचार को बनाने में संस्कृति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।" रूमानीवाद के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन करें। (2025)

Answer –
  • (i) राष्ट्र के विचार के निर्माण में संस्कृति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कला, काव्य, कहानियों और संगीत ने राष्ट्रवादी भावनाओं को आकार देने व व्यक्त करने में मदद की।
  • (ii) रूमानीवाद एक ऐसा सांस्कृतिक आंदोलन था जिसने राष्ट्रवादी भावनाओं का एक विशेष रूप विकसित करने की मांग की।
  • (iii) रूमानी कलाकारों और कवियों ने तर्क वितर्क और विज्ञान के महिमामंडन की आलोचना की और उसकी जगह भावनाओं, अंतर्ज्ञान और रहस्यमय भावनाओं पर ध्यान केंद्रित किया।
  • (iv) उनका प्रयास एक राष्ट्र के आधार के रूप में एक साझा सामूहिक विरासत, एक सामान्य सांस्कृतिक अतीत की भावना पैदा करना था।
  • (v) जर्मन दार्शनिक जोहान गॉटफ्रीड हर्डर (1744-1803) जैसे अन्य लोगों ने दावा किया कि सच्ची जर्मन संस्कृति की खोज आम लोगों (दास वोल्क) के बीच की जाएगी।
  • (vi) लोक गीतों, लोक कविता और लोक नृत्यों के माध्यम से राष्ट्र की सच्ची भावना (वोल्क्सजिस्ट) को लोकप्रिय बनाया गया था। इसलिए लोक संस्कृति के इन रूपों को एकत्र करना और रिकॉर्ड करना राष्ट्र-निर्माण की परियोजना के लिए आवश्यक था।
  • (vii) स्थानीय भाषा और स्थानीय लोककथाओं के संग्रह पर जोर न केवल एक प्राचीन राष्ट्रीय भावना को पुनः प्राप्त करने के लिए था, बल्कि आधुनिक राष्ट्रवादी संदेश जनसंख्या के बड़े हिस्से तक ले जाने के लिए भी था, जो ज्यादातर निरक्षर थे।
  • (viii) पोलैंड, जिसे अठारहवीं शताब्दी के अंत में महान शक्तियों रूस, प्रशिया और ऑस्ट्रिया द्वारा विभाजित किया गया था। उस देश ने भी संगीत और भाषा के माध्यम से राष्ट्रीय भावनाओं को जीवित रखा।
  • (ix) उदाहरण के लिए, कैरोल कुर्पिस्की ने अपने ऑपेरा और संगीत के माध्यम से पोलिश राष्ट्रीय संघर्ष का गुणगान किया गया। पोलोनेस और माजुरका जैसे लोक नृत्यों को राष्ट्रवादी प्रतीकों में बदल दिया।
  • (x) पोलिश के प्रयोग को रूसी प्रभुत्व के विरुद्ध संघर्ष के प्रतीक के रूप में देखा जाने लगा।

ब्रिटेन का एकीकरण :

  • 18वीं सदी से पहले ब्रिटेन एक राष्ट्र राज्य नहीं था। इंग्लैंड में अंग्रेज, वेल्श, स्कॉट और आयरिश जैसे कई नृजातीय समूहों के लोग थे जिनकी अपनी सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराएँ थी।
  • औद्योगिक क्रांति के बाद इंग्लैंड की आर्थिक शक्ति में वृद्धि हुई और इसने अपनी शक्ति में विस्तार के साथ-साथ अन्य राष्ट्रों व द्वीप समूहों पर विस्तार आरंभ किया।
  • इंग्लैंड की संसद और राजपरिवार के मध्य एक लम्बे टकराव तथा संघर्ष के पश्चात आंग्ल संसद द्वारा 1688 में राजतंत्र से सत्ता को छीन लिया गया तथा आंग्ल संसद के द्वारा ब्रिटेन राष्ट्र-राज्य का निर्माण हुआ। जिसके केंद्र में इंग्लैंड था।
  • 1707 में इंग्लैंड और स्कॉटलैंड के बीच ऐक्ट ऑफ यूनियन के माध्यम से 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन' का गठन हुआ। इस एक्ट के अनुसार इंग्लैंड का स्कॉटलैंड पर प्रभुत्व स्थापित हो गया।
  • 1798 में हुए असफल विद्रोह के बाद 1801 में आयरलैंड को बलपूर्वक यूनाइटेड किंगडम में शामिल कर लिया गया।
  • सभी क्षेत्रों में स्कॉटलैंड और आयरलैंड पर इंग्लैंड हावी रहा।
  • ब्रिटेन के प्रतीक चिहनों, ब्रितानी झंडा (यूनियन जैक) और राष्ट्रीय गान (गॉड सेव अवर नोबल किंग) को खूब बढ़ावा दिया गया।
  • इस प्रकार ग्रेट ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन का गठन अचानक उथल-पुथल या क्रांति का परिणाम नहीं था। यह एक लंबी प्रक्रिया का परिणाम था।

राष्ट्र की दृश्य कल्पना:

  • अठाहरवीं एवं उन्नीसवीं शताब्दी में कलाकारों ने राष्ट्र को कुछ यूँ चित्रित किया जैसे वह कोई व्यक्ति हो। 
  • राष्ट्रों को नारी वेश में प्रस्तुत किया जाता था। राष्ट्र को व्यक्ति का जामा पहनाते हुए जिस नारी रूप को चुना गया वह असल जीवन में कोई खास महिला नहीं थी। 
  • यह तो राष्ट्र के अमूर्त विचार को ठोस रूप प्रदान करने का प्रयास था। यानी नारी की छवि राष्ट्र का रूपक बन गई। 
  • फ्रांस में उसे लोकप्रिय ईसाई नाम मारिआना दिया गया जिसने जन-राष्ट्र के विचार को रेखांकित किया। 
  • इसी प्रकार जर्मेनिया, जर्मन राष्ट्र का रूपक बन गई।

राष्ट्रवाद के उदय में महिलाओं का योगदान :

  • राजनैतिक संगठन का निर्माण
  • समाचार पत्रों का प्रकारान
  • मताधिकार प्राप्ति हेतु संघर्ष
  • राजनैतिक बैठकों तथा प्रदर्शनों में हिस्सा लेना।

Question – 1871 के बाद किस प्रकार बाल्कन क्षेत्र यूरोप में गंभीर राष्ट्रवादी तनाव के स्रोत बन गया? (2024)
Question – "1871 के बाद यूरोप में राष्ट्रवादी तनाव का सबसे गंभीर स्रोत बाल्कन नामक क्षेत्र था।" स्लाविक आंदोलन के संदर्भ में इस कथन का मूल्यांकन करें। (2025)

Answer –
  • (i) बाल्कन भौगोलिक और जातीय विविधता वाला क्षेत्र था।
  • (ii) बाल्कन का एक बड़ा हिस्सा ऑटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में था।
  • (iii) आटोमन साम्राज्य के विघटन के साथ बाल्कन में रूमानी राष्ट्रवाद के विचारों के प्रसार ने इस क्षेत्र को बहुत विस्फोटक बना दिया।
  • (iv) एक-एक करके, इसकी यूरोपीय विषय राष्ट्रीयताएँ इसके नियंत्रण से अलग हो गई और स्वतंत्रता की घोषणा की।
  • (v) बाल्कन लोगों ने स्वतंत्रता या राजनीतिक अधिकारों के लिए अपने दावों को राष्ट्रीयता पर आधारित किया।
  • (vi) चूंकि विभिन्न स्लाव राष्ट्रीयताओं ने अपनी पहचान और स्वतंत्रता को परिभाषित करने के लिए संघर्ष किया, बाल्कन क्षेत्र तीव्र संघर्ष का क्षेत्र बन गया।
  • (vii) बाल्कन राज्य एक-दूसरे से बहुत ईर्ष्या करते थे और प्रत्येक को दूसरे की कीमत पर अधिक क्षेत्र हासिल करने की आशा करते थे।
  • (viii) मामला और भी जटिल हो गया क्योंकि बाल्कन भी बड़ी शक्ति प्रतिद्वंद्विता का स्थल बन गया।
  • (ix) इस अवधि के दौरान, व्यापार और उपनिवेशों के साथ-साथ नौसैनिक और सैन्य शक्ति को लेकर यूरोपीय शक्तियों के बीच तीव्र प्रतिद्वंद्विता थी।
  • (x) प्रत्येक शक्ति रूस, जर्मनी, इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया-हंगरी बाल्कन पर अन्य शक्तियों की पकड़ को मुकाबला करने और क्षेत्र पर अपना नियंत्रण बढ़ाने के लिए उत्सुक थी।
  • (xi) इसके कारण क्षेत्र में कई युद्ध हुए और अततः प्रथम विश्व युद्ध हुआ।

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