फ्रांसीसी क्रांति Class 9 SST History Chapter 01 notes
Ch.01 फ्रांसीसी क्रांति (French Revolution)
फ्रांसीसी क्रांति कब प्रारंभ हुआ?
फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत 14 जुलाई 1789 को सम्राट की निरंकुश शक्तियों के प्रतीक बास्तील के किले को तोड़ने के साथ शुरू हुआ।
फ्रांसीसी क्रांति के कारण:
सामाजिक कारण –
समाज का वर्गों में बटा होना
सामाजिक विभेद
मध्यम वर्ग का उदय
राजनीतिक कारण –
राजा का अयोग्य शासन
उच्च वर्ग को विशेषाधिकार
तात्कालिक कारण –
लुई XVI का नया कर लगाने का प्रस्ताव
आर्थिक कारण –
लगभग 12 अरब लिब्रे का कर्ज।
खाली राजकोष
आजीविका संकट
कर व्यवस्था
सुधारकों एवं विचारकों का प्रभाव –
रूसों
जॉन लॉक
मोंटेस्क्यू
मिराब्यो
आबे सिए
फ्रांसीसी क्रांति के सामाजिक कारण:
अठारहवीं शताब्दी के दौरान फ्रांसीसी समाज तीन वर्गों में विभाजित था —
प्रथम एस्टेट (The Clergy) – जिसमें चर्च के पादरी आते थे।
द्वितीय एस्टेट (The Nobality) – जिसमें फ्रांसीसी समाज का कुलीन वर्ग आता था।
तृतीय एस्टेट – जिसमें बड़े व्यवसायी, व्यापारी, अदालती कर्मचारी, वकील, किसान, कारीगर, भूमिहीन मजदूर आदि आते थे।
लगभग 60% जमीन पर कुलीनों, चर्च और तीसरे एस्टेट के अमीरों का अधिकार था।
प्रथम दो एस्टेट्स पादरी वर्ग और कुलीन वर्ग के लोगों को जन्म से कुछ विशेषाधिकार प्राप्त थे जैसे; राज्य को दिये जाने वाले कर (टैक्स) से छूट।
राज्य के सभी टैक्स केवल तृतीय एस्टेट द्वारा दिए जाते थे।
कर (Tax) के प्रकार :
टाइद (TITHE) :- तृतीय एस्टेट से चर्च द्वारा वसूला जाने वाला कर था।
टाइल (TAILLE) :- तृतीय एस्टेट से सरकार द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स था।
फ्रांसीसी क्रांति के आर्थिक कारण:
निर्वाह संकट :-
फ्रांस की जनसंख्या 1715 में लगभग 2.3 करोड़ से बढ़कर 1789 में 2.8 करोड़ हो गई।
अनाज उत्पादन की तुलना में उसकी माँग काफ़ी तेज़ी से बढ़ी। अधिकांश लोगों के मुख्य खाद्य पावरोटी की कीमत में तेजी से वृद्धि हुई।
अधिकतर कामगार कारखानों में मज़दूरी करते थे और उनकी मज़दूरी मालिक तय करते थे। लेकिन मज़दूरी महँगाई की दर से नहीं बढ़ रही थी। फलस्वरूप अमीर गरीब की खाई चौड़ी होती गई।
स्थितियाँ तब और बदतर हो जातीं जब सूखे या ओले के प्रकोप से पैदावार गिर जाती। इससे रोज़ी रोटी का संकट पैदा हो जाता था। ऐसे जीविका संकट प्राचीन राजतंत्र के दौरान फ्रांस में काफ़ी आम थे।
इससे खाद्यान्नों की कमी या जीवन निर्वाह संकट पैदा हो गया जो पुराने शासन के दौरान बार बार होने लगा।
फ्रांसीसी क्रांति के राजनीतिक कारण:
मध्यम वर्ग, जिसमें वकील, शिक्षक, लेखक, विचारक आदि आते थे, ने जन्म आधारित विशेषाधिकार पर प्रश्न उठाने शुरू कर दिये।
मध्यवर्ग :-
18वीं सदी में एक नए सामाजिक समूह का उदय हुआ जिसे मध्यवर्गकहा गया।
उभरते मध्यवर्ग ने विशेषाधिकारों के अंत की कल्पना की।
जिसने ऊनी तथा रेशमी वस्त्रों के उत्पादन के बल पर संपत्ति अर्जित की थी।
यह सभी पढ़े लिखे होते थे और इनका मानना था कि समाज के किसी भी समूह के पास जन्म से विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए।
लुई XVI :-
1774 में लुई XVI फ्रांस की राजगद्दी पर आसीन हुआ।
वह फ्रांस के बूर्बों राजवंश का राजा था। उसका विवाह आस्ट्रिया की राजकुमारी मेरी एन्तोएनेत से हुआ था।
राज्यारोहण के समय उसका राजकोष खाली था जिसके निम्नलिखित कारण थे:-
लंबे युद्धों के कारण वित्तीय संसाधनों का नष्ट होना।
पूर्ववर्ती राजाओं की शानो शौकत पर फिजूलखर्ची।
अमरीकी स्वतंत्रता संघर्ष में ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिका की सहायता करना।
जनसंख्या का बढ़ना और जीविका संकट।
विचारकों की भूमिका :
जॉन लॉक: स्वतंत्रता और समानता के विचार।
पुस्तक– Two Treatises of government
रूसो: पुस्तक – Social Contract में समानता की वकालत।
मॉन्टेस्क्यू: सत्ता के तीन अंगों (विधान, कार्यपालिका, न्यायपालिका) का सिद्धांत।
फ्रांस संवैधानिक राजतंत्र:
20 जून 1789 को लोग वर्साय के एक टेनिस कोर्ट में एकत्रित हुए और अपने आप को नेशनल असेंबली घोषित कर दिया।
अपनी विद्रोही प्रजा की शक्तियों का अनुमान करके लुई XVI ने नेशनल असेंबली को मान्यता दे दी।
4 अगस्त 1789 की रात को असेंबली ने करों, कर्तव्यों और बंधनों वाली सामंती व्यवस्था के उन्मूलन का आदेश पारित कर दिया ।
1791 में फ्रांस में संवैधानिक राजतंत्र की नींव पड़ी।
नेशनल असेंबली का उद्देश्य:
इसका मुख्य उद्देश्य सम्राट की शक्तियों को सीमित करना था।
एक व्यक्ति के हाथ में केंद्रीकृत होने के बजाय अब इन शक्तियों को अलग-अलग संस्थाओं में बांटा जाएगा। जैसे; विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका।
सन् 1791 के संविधान ने कानून बनाने का अधिकार नेशनल असेंबली को सौंप दिया।
नए संविधान के अनुसार —
मतदान का अधिकार केवल सक्रिय नागरिकों (Active Citizens) को मिला जो :-
केवल पुरुष थे
जिनकी उम्र 25 वर्ष से अधिक थी,
जो कम से कम तीन दिन की मजदूरी के बराबर कर चुकाते थे,
महिलाओं एवं अन्य पुरूषों को निष्क्रिय नागरिक (Passive Citizen) कहा जाता था।
राजा की शक्तियों को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में विभाजित एवं हस्तांतरित कर दिया गया।
राजनीतिक प्रतीकों के मायने:
टूटी हुई जंजीर :- दासो को बांधने के लिए जंजीरों का प्रयोग किया जाता था टूटी हुई हथकड़ी उनकी आजादी का प्रतीक है।
छड़ो का गट्ठर :- अकेली छड़ को आसानी से तोड़ा जा सकता है पर पूरे गट्ठर को नहीं। अत: यह एकता में ही बल है का प्रतीक है।
त्रिभुज के अंदर रोशनी बिखेरती आंख :- सर्वदर्शी आंख ज्ञान का प्रतीक है। सूरज की किरणे अज्ञान रूपी अंधेरे को मिटा देती है।
राजदंड :- शाही सत्ता का प्रतीक है।
अपनी पूंछ मुंह में लिए सांप :- समानता का प्रतीक अंगूठी का कोई और छोर नहीं होता।
आतंक राज:
सन 1793 से 1794 तक के काल को आतंक का युग कहा जाता है।
इस समय रोबिस्पेयर ने नियंत्रण एवं दंड की सख्त नीति अपनाई।
इस नीति के तहत गणतंत्र के जो भी शत्रु थे जैसे; कुलीन एवं पादरी और अन्य राजनीतिक दलों के सदस्य जो उनके काम से सहमत नहीं है सभी को गिरफ्तार कर के जेल में डाल दिया जाएगा।
एक क्रांतिकारी न्यायालय द्वारा उन पर मुकदमा चलाया जाएगा और यदि वह दोषी पाते हैं तो गिलोटिन पर चढ़ा कर उनका सिर कलम कर दिया जाएगा।
किसानों को अपना अनाज शहरों में ले जाकर सरकार द्वारा तय की गई कीमत पर बेचने के लिए बाध्य किया गया।
रोबिस्पेयर ने अपनी नीतियों को इतनी सख्ती से लागू किया कि उसके समर्थक भी त्राहि-त्राहि करने लगे। अंततः जुलाई 1794 में न्यायालय द्वारा उसे दोषी ठहराया गया और गिरफ्तार करके अगले ही दिन उसे गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया।
डिरेक्टरी शासित फ्रांस:
रोबिस्पेयर के पतन के बाद फ्रांस का शासन मध्यम वर्ग के सम्पन्न लोगों के पास आ गया।
दो निर्वाचित विधान परिषद (Legislative council) का निर्माण किया गया।
उन्होंने पाँच सदस्यों वाली एक कार्यपालिका डिरेक्टरी को नियुक्त किया, जो फ्रांस का शासन देखती थी।
लेकिन अक्सर विधान परिषद से उनके हितों का टकराव होता रहता था। इस राजनैतिक अस्थिरता का फायदा नेपोलियन बोनापार्ट ने उठाया और उसने 1799 में डिरेक्टरी को खत्म कर दिया और 1804 में फ्रांस का सम्राट बन गया।
नेपोलियन:
1804 में नेपोलियन ने खुद को फ्रांस का सम्राट घोषित किया।
उन्होंने पड़ोसी यूरोपीय देशों को जीतने के लिए, राजवंशों को दूर करने और उन राज्यों का निर्माण करने के लिए निर्धारित किया जहां उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को रखा।
उन्होंने यूरोप के आधुनिकीकरणकर्ता के रूप में अपनी भूमिका देखी।
अंततः वह 1815 में वाटरलू के युद्ध में पराजित हुआ।
क्या महिलाओं के लिए भी क्रांति हुई?
महिलाएं शुरू से ही फ्रांसीसी समाज में अहम परिवर्तन लाने वाली गतिविधियों में शामिल हुआ करती थी। ज्यादातर महिलाएं जीविका निर्वाह के लिए काम करती थी। वे सिलाई बुनाई, कपड़ों की धुलाई करती थी बाजारों में फल फूल सब्जियां बेचती थी।
ज्यादातर महिलाओं के पास पढ़ाई लिखाई के मौके नहीं थे। यह मौके केवल कुलीनों की लड़कियों अथवा धनी परिवारों की लड़कियों के पास था।
इसके बाद उनकी शादी कर दी जाती थी।
महिलाओं को अपने परिवार का पालन पोषण करना होता था जैसे खाना पकाना, पानी लाना, लाइन लगाकर पावरोटी लाना और बच्चों की देखरेख करना उनकी मजदूरी पुरुषों की तुलना में कम थी।
उनकी एक प्रमुख मांग यह थी कि महिलाओं को पुरुषों के समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त होने चाहिए।
महिलाओं के जीवन में सुधार लाने के लिए उठाए गए कदम:
क्रांतिकारी सरकार (Revolutionary Government) ने महिलाओं के जीवन में सुधार लाने वाले कुछ कानून लागू किए जो इस प्रकार है —
सरकारी विद्यालयों की स्थापना के साथ ही सभी लड़कियों के लिए स्कूली शिक्षा को अनिवार्य बना दिया गया।
अब पिता उन्हें उनकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए बातें नहीं कर सकते थे।
महिलाओं को भी तलाक का अधिकार प्रदान किया गया।
अब महिलाएं व्यवसायिक प्रशिक्षण ले सकती है कलाकार बन सकती है और छोटे मोटे व्यवसाय भी चला सकती है।
मताधिकार और समान वेतन के लिए महिलाओं का आंदोलन अगली सदी में भी अनेक देशों में चलता रहा।
अंततः सन 1946 में फ्रांस की महिलाओं ने मताधिकार हासिल कर लिया।
दास प्रथा का उन्मूलन:
दास व्यापार सत्रहवीं शताब्दी में शुरू हुआ।
फ्रांसीसी सौदागर बंदरगाह से अफ्रीका तट पर जहाज ले जाते थे जहां वे स्थानीय सरदारों से दास खरीदते थे।
दासो को हथकड़िया डालकर अटलांटिक महासागर के पार कैरिबिआई देशों तक 3 महीने की लंबी समुद्री यात्रा के लिए जहाजों में ठूंस दिया जाता था।
वहां उन्हें बागान मालिकों को बेच दिया जाता था।
बोर्दे और नान्ते जैसे बंदरगाह फलते फूलते दास व्यापार के कारण ही समृद्ध नगर बन गए। 18वीं सदी में फ्रांस में दास प्रथा की ज्यादा निंदा नहीं हुई।
लेकिन सन 1794 के कन्वेंशन ने फ्रांसीसी उपनिवेशों में सभी दासों की मुक्ति का कानून पारित किया।
यह कानून एक छोटी सी अवधि तक ही लागू रहा। 10 वर्ष बाद नेपोलियन ने दास प्रथा पुनः शुरू कर दी।
फ्रांसीसी उपनिवेशों से अंतिम रूप से दास प्रथा का उन्मूलन 1848 में किया गया।
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