भारत में राष्ट्रवाद – Class 10 NCERT History Chapter 2 Notes & Question Answer

Chapter 02 : भारत में राष्ट्रवाद (Nationalism in India)


राष्ट्रवाद का अर्थ:

  • अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना, एकता की भावना तथा एक समान चेतना राष्ट्रवाद कहलाती है।

  • इसमें लोग समान ऐतिहासिक, राजनीतिक तथा सांस्कृतिक विरासत साझा करते है। कई बार लोग विभिन्न भाषाई समूह के हो सकते हैं (जैसे भारत) लेकिन राष्ट्र के प्रति प्रेम उन्हें एक सूत्र में बांधे रखता है।


राष्ट्रवाद को जन्म देने वाले कारक:

  • यूरोप में राष्ट्रवाद राष्ट्र राज्यों के उदय से जुड़ा हुआ है।

  • भारत, वियतनाम जैसे उपनिवेशों में राष्ट्रवाद उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन से जुड़ा है।


Question – “भारत में आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय की परिघटना उपनिवेशवाद विरोधी आंदोलन के साथ गहरे तौर जुड़ी हुई थी।” इस कथन का विश्लेषण कीजिए। (2024)

Question – भारत में 'आधुनिक राष्ट्रवाद' के उदय में उपनिवेश-विरोधी आंदोलन की भूमिका की व्याख्या कीजिए। (2025)

Answer –

  • (i) उपनिवेशवाद के विरुद्ध संघर्ष की प्रक्रिया में लोगों को अपनी एकता का एहसास होने लगा।

  • (ii) उपनिवेशवाद के तहत उत्पीड़ित होने की भावना ने विभिन्न समूहों को एक दूसरे से बाँध दिया था।

  • (iii) महात्मा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने इन समूहों को इकट्ठा करके एक विशाल आंदोलन खड़ा किया।

  • (iv) भारत माता एवं वंदे मातरम राष्ट्रवाद के प्रतीक बन गए।

  • (v) ब्रिटिश सरकार विरोधी आंदोलन जैसे असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन आदि उपनिवेशवाद विरोध का प्रतीक बन गए।


प्रथम विश्वयुद्ध का भारत पर प्रभाव तथा युद्ध पश्चात परिस्थितियाँ:

  • युद्ध के कारण रक्षा संबंधी खर्चे में बढ़ोतरी हुई थी।

  • इसे पूरा करने के लिए कर्जे लिये गए और टैक्स बढ़ाए गए।

  • अतिरिक्त राजस्व जुटाने के लिए कस्टम ड्यूटी और इनकम टैक्स को बढ़ाना पड़ा।

  • युद्ध के वर्षों में चीजों की कीमतें बढ़ गई। 

  • 1914 से 1918 के बीच दाम दोगुने हो गए।

  • ग्रामीण इलाकों से लोगों को जबरन सेना में भर्ती किए जाने से भी लोगों में बहुत गुस्सा था।

  • भारत के कई भागों में उपज खराब होने के कारण भोजन की कमी हो गई।

  • फ़्लू की महामारी ने समस्या को और गंभीर कर दिया। 

  • 1921 की जनगणना के अनुसार, अकाल और महामारी के कारण 120 लाख से 130 लाख तक लोग मारे गए।


सत्याग्रह:

  • यह सत्य तथा अहिंसा पर आधारित एक नए तरह का जन आंदोलन करने का रास्ता था।


महात्मा गांधी के सत्याग्रह का अर्थ:

  • सत्याग्रह ने सत्य पर बल दिया।

  • गाधीजी का मानना था कि यदि कोई सही मकसद के लिए लड़ रहा हो तो उसे अपने ऊपर अत्याचार करने वाले से लड़ने के लिए ताकत की जरूरत नहीं होती है। 

  • अहिंसा के माध्यम से एक सत्याग्रही लड़ाई जीत सकता है।


महात्मा गाँधी द्वारा भारत में किए गए सत्याग्रह के आरंभ:

  • महात्मा गांधी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे।

  • भारत में सबसे पहले चंपारण (बिहार) 1917 में नील की खेती करने वाले किसानों के लिए दमनकारी बागान व्यवस्था के खिलाफ  सत्याग्रह किया।

  • 1917 में खेड़ा गुजरात किसानों को कर (Tax) में छूट दिलवाने के लिए, तथा

  • 1918 में अहमदाबाद (गुजरात) के कपड़ा कारखाने में काम करने वाले मजदूरों के समर्थन में गांधीजी ने सत्याग्रह आंदोलन किया।


रॉलट ऐक्ट 1919:

रॉलट ऐक्ट का मुख्य प्रावधान –

  • राजनीतिक कैदियों को बिना मुकदमा चलाए दो साल तक जेल में बंद रखने का प्रावधान।

रॉलट ऐक्ट का उद्देश्य –

  • भारत में राजनीतिक गतिविधियों का दमन करना।

रौलट ऐक्ट अन्यायपूर्ण क्यों था?

  • भारतीयों की नागरिक आजादी पर प्रहार किया। 

  • भारतीय सदस्यों की सहमति के बगैर पास किया गया।

रॉलट ऐक्ट के परिणाम –

  • 6 अप्रैल को महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक अखिल भारतीय हड़ताल का आयोजन। 

  • विभिन्न शहरों में रैली, जूलूस हुए।

  • रेलवे वर्कशॉप्स में कामगारों का हड़ताल हुई।

  • दुकाने बंद हो गई।

  • स्थानीय नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। 

  • बैंकों, डाकखानों और रेलवे स्टेशन पर हमले हुए।


जलियावाला बाग हत्याकांड की घटना:

  • 10 अप्रैल 1919 को अमृतसर में पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई। इसके कारण लोगों ने जगह जगह पर सरकारी संस्थानों पर आक्रमण किया। अमृतसर में मार्शल लॉ लागू हो गया और इसकी कमान जनरल डायर के हाथों में सौंप दी गई।

  • जलियांवाला बाग का दु:खद नरसंहार 13 अप्रैल 1919 को उस दिन हुआ जिस दिन पंजाब में बैसाखी मनाई जा रही थी।

  • ग्रामीणों का एक जत्था जलियांवाला बाग में लगे एक मेले में शरीक होने आया था। यह बाग चारों तरफ से बंद था और निकलने के रास्ते संकीर्ण थे।

  • जनरल डायर ने निकलने के रास्ते बंद करवा दिये और भीड़ पर गोली चलवा दी। इस दुर्घटना में सैंकड़ो लोग मारे गए। सरकार का रवैया बड़ा ही क्रूर था। 

  • इससे भारत के बहुत सारे शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए।

  • हड़ताले होने लगी, लोग पुलिस से मोर्चा लेने लगे और सरकारी इमारतों पर हमला करने लगे। 

  • हिंसा फैलते देख महात्मा गांधी ने रॉलट सत्याग्रह वापस ले लिया।


महात्मा गांधी ने खिलाफत का मुद्दा क्यों उठाया?

  • खलीफा की तात्कालिक शक्तियों की रक्षा के लिए मार्च 1919 में अली बंधुओं (मुहम्मद अली और शौकत अली) द्वारा बम्बई में एक खिलाफत समिति का गठन किया गया।

  • रॉलट सत्याग्रह की असफलता के बाद से ही महात्मा गांधी पूरे भारत में और भी ज्यादा जनाधार वाला आंदोलन खड़ा करना चाहते थे।

  • उन्हें विश्वास था कि बिना हिंदू और मुस्लिम को एक दूसरे के समीप लाए ऐसा कोई अखिल भारतीय आंदोलन खड़ा नही किया जा सकता इसलिए उन्होने खिलाफत का मुद्दा उठाया।


  • हिंद स्वराज (1909) – महात्मा गांधी द्वारा लिखित प्रसिद्ध पुस्तक, जिसमें भारत में ब्रिटिश शासन के असहयोग पर जोर दिया गया था।


असहयोग आंदोलन

असहयोग क्यों?

  • अपनी प्रसिद्ध पुस्तक हिंद स्वराज (1909) में महात्मा गाँधी ने लिखा कि “भारत में अंग्रेजी राज इसलिए स्थापित हो पाया क्योंकि भारतीयों ने उनके साथ सहयोग किया और उसी सहयोग के कारण अंग्रेज हुकूमत करते रहे। यदि भारतीय सहयोग करना बंद कर दें तो अंग्रेजी राज एक साल के अंदर चरमरा जायेगी और स्वराज आ जायेगा।” 

  • गाँधीजी को विश्वास था कि यदि भारतीय लोग सहयोग करना बंद करने लगे, तो अंग्रेजों के पास भारत को छोड़कर चले जाने के अलावा और कोई चारा नहीं रहेगा।


Question – किन्हीं तीन कारणों का वर्णन कीजिए जो असहयोग आंदोलन के लिए उतरदायी थे। (2024)

Answer – 

  • (i) रॉलेट एक्ट

  • (ii) भारत सरकार अधिनियम 1919

  • (iii) जलियाँवाला बाग हत्याकांड

  • (iv) खिलाफत आंदोलन

  • (v) स्वराज की मांग

  • (vi) 1920 के कांग्रेस के अधिवेशन


असहयोग आंदोलन के कुछ प्रस्ताव:

  • अंग्रेजी सरकार द्वारा प्रदान की गई उपाधियों को वापस करना।

  • सिविल सर्विस, सेना, पुलिस कोर्ट लेजिस्लेटिव काउंसिल और स्कूलों का बहिष्कार।

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।

  • यदि सरकार अपनी दमनकारी नीतियों से बाज न आये तो संपूर्ण अवज्ञा आंदोलन शुरु करना।


असहयोग आंदोलन से संबंधित कांग्रेसी अधिवेशन:

  • सितंबर 1920, कलकत्ता अधिवेशन: असहयोग पर अन्य नेताओं द्वारा स्वीकृति का प्रस्ताव

  • दिसंबर 1920, नागपुर अधिवेशन: स्वीकृति पर मोहर तथा इसकी शुरूआत पर सहमति

  • असहयोग खिलाफत आंदोलन की शुरुआत जनवरी 1921 में हुई थी।


शहरों में असहयोग आंदोलन धीमा क्यों पड़ने लगा?

  • मिल के कपड़े की तुलना में खादी का कपड़ा अधिक महंगा था और गरीब लोग इसे खरीद नहीं सकते थे। परिणामस्वरूप वे बहुत लंबे समय तक मिल के कपड़े का बहिष्कार नहीं कर सकते थे।

  • वैकल्पिक भारतीय संस्थान वहां नहीं थे जिनका इस्तेमाल अंग्रेजों की जगह किया जा सकता था।

  • इसलिए छात्रों और शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों में वापस आना शुरू कर दिया और वकील सरकारी अदालतों में काम से जुड़ गए।


Question – असहयोग आंदोलन के आर्थिक प्रभावों का विश्लेषण कीजिए। (2024)

Answer –

  • (i) विदेशी सामानों का बहिष्कार

  • (ii) स्वदेशी उद्योगों का विकास

  • (iii) ब्रिटिश कंपनियों के राजस्व में गिरावट

  • (iv) सरकार के राजस्व पर बुरा असर

  • (v) स्व आर्थिक निर्भरता


Question – "आदिवासी किसानों ने महात्मा गांधी के संदेश और 'स्वराज' के विचार की एक अलग तरह से व्याख्या की।" असहयोग आंदोलन के संदर्भ में इस कथन की व्याख्या कीजिए। (2025)

Answer –

  • (i) असहयोग आंदोलन की शुरुआत शहरों में हुई थी, जो तेजी से गांवों और आदिवासी इलाकों में फैल गया। सभी ने स्वराज के आह्वान का समर्थन किया, लेकिन अलग-अलग लोगों के लिए इस शब्द का मतलब अलग-अलग था।
  • (ii) आदिवासी किसानों ने महात्मा गांधी के संदेश और स्वराज के विचार की एक अन्य तरीके से व्याख्या की।
  • (iii) उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश के गुडेम हिल्स में 1920 के दशक के प्रारंभ में एक उग्रवादी गुरिल्ला आंदोलन फैला, जो संघर्ष का ऐसा रूप नहीं था जिसे कांग्रेस स्वीकार कर सकती थी।
  • (iv) अन्य वन क्षेत्रों में, औपनिवेशिक सरकार ने बड़े वन क्षेत्रों को बंद कर दिया था, जिससे लोगों को अपने मवेशियों को चराने या ईंधन और फल इकट्ठा करने के लिए जंगलों में प्रवेश करने से रोक दिया गया था। इससे पहाड़ी लोग नाराज़ हो गए।
  • (v) न केवल उनकी आजीविका प्रभावित हुई बल्कि उन्हें लगा कि उनके पारंपरिक अधिकारों से भी इनकार किया जा रहा है।
  • (vi) जब सरकार ने सड़क निर्माण के लिए उन पर बेगार देने का दबाव बनाना शुरू किया तो पहाड़ी लोगों ने विद्रोह कर दिया।
  • (vii) उनके नेता अल्लूरी सीताराम राजू ने दावा किया कि उनके पास कई प्रकार की विशेष शक्तियाँ हैं:
  • (viii) वे असहयोग आंदोलन से प्रेरित थे और उन्होंने लोगों को खादी पहनने और शराब छोड़ने के लिए प्रेरित किया।
  • (ix) उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को केवल बल के प्रयोग से ही आजाद कराया जा सकता है, अहिंसा से नहीं।
  • (x) गुडेम विद्रोहियों ने पुलिस स्टेशनों पर हमला किया, ब्रिटिश अधिकारियों को मारने का प्रयास किया और स्वराज प्राप्त करने के लिए गुरिल्ला युद्ध किया। राजू को 1924 में पकड़ लिया गया और उसे मार दिया गया, और समय के साथ वह एक लोक नायक बन गया।


Question – “मजदूरों की भी महात्मा गांधी और स्वराज की अवधारणा के बारे में अपनी समझ थी।” असम के बागान मजदूरों के संदर्भ में इस कथन का समर्थन कीजिए। (2025)

Answer –

  • (i) महात्मा गांधी के विचारों और स्वराज की धारणा के बारे में श्रमिकों की भी अपनी समझ थी।
  • (ii) असम में बागान मजदूरों के लिए स्वतंत्रता का मतलब था कि उन्हें बागानों के अन्दर और बाहर स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार मिले।
  • (iii) इसका अर्थ था उस गांव से संपर्क बनाए रखना जहां से वे आए थे।
  • (iv) 1859 के अंतर्देशीय उत्प्रवास अधिनियम (Inland Emigration Act) के तहत, बागान श्रमिकों को बिना अनुमति के चाय बागानों को छोड़ने की अनुमति नहीं थी और ना ही उन्हें यह अनुमति कभी दी जाती थी।
  • (v) जब उन्होंने असहयोग आंदोलन के बारे में सुना, तो हजारों श्रमिकों ने अधिकारियों की अवहेलना की, बागानों को छोड़ दिया और घर की ओर चल पड़े।
  • (vi) उनका मानना ​​था कि गांधी राज आने वाला है और सभी को अपने-अपने गाँव में ज़मीन दी जाएगी।
  • (vii) हालांकि, वे कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचे। रेलवे और स्टीमर हड़ताल के कारण रास्ते में ही फंस गए, उन्हें पुलिस ने पकड़ लिया और बेरहमी से पीटा।


असहयोग आंदोलन की समाप्ति:

  • फरवरी 1922 में महात्मा गांधी ने आंदोलन वापस ले लिया क्योंकि गोरखपुर के चौरी-चौरा नामक स्थान पर हिंसक घटना हो गई थी।


सविनय अवज्ञा आंदोलन :

Question – सविनय अवज्ञा आंदोलन के किन्हीं तीन कारणों का वर्णन कीजिए। (2024)

Answer –

  • (i) साइमन कमीशन का गठन जिसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था।

  • (ii) साइमन कमीशन के विरोध में प्रदर्शन करते समय लाला लाजपत राय की मृत्यु ने पूरे देश में आक्रोश की भावना को बढ़ावा दिया।

  • (iii) साइमन कमीशन के विरोध के दौरान अंग्रेज सरकार का दमनचक्र।

  • (iv) नमक कानून लागू करना।

  • (v) डोमिनियन स्टेटस के लिए लॉर्ड इरविन के अस्पष्ट प्रस्ताव।

  • (vi) कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन (1929)

  • (vii) 'पूर्ण स्वराज' की मांग।

  • (viii) गांधीजी की मांगों की उपेक्षा।


नमक यात्रा और असहयोग आंदोलन (1930):

  • जनवरी 1930 में महात्मा गांधी ने लार्ड इरविन के समक्ष अपनी 11 मांगे रखी।

  • ये मांगे उद्योगपतियों से लेकर किसान तक विभिन्न तबके से जुड़ी हुई थी।

  • इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग नमक कर को खत्म करने की थी।

  • लार्ड इरविन इनमें से किसी भी माँग को मानने के लिए तैयार नही थे।

  • 12 मार्च 1930 को महात्मा गांधी द्वारा नमक यात्रा की शुरूआत की गई। 

  • 6 अप्रैल 1930 को गुजरात के दांडी में नमक बनाकर नमक कानून का उल्लंघन किया गया।

  • यह घटना सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत थी।


गाँधी-इरविन समझौते की विशेषताएँ:

  • 5 मार्च 1931 ई. को गाँधी इरविन समझौता हुआ। इसके अनुसार—

    • सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित कर दिया जाये।

    • पुलिस द्वारा किए अत्याचारों की निष्पक्ष जाँच की जाये।

    • नमक पर लगाए गए सभी कर हटाए जाएँ।


आंदोलन में किसने भाग लिया?

  • देश के विभिन्न हिस्सों में सविनय अवज्ञा आंदोलन लागू हो गया। गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी तक अपने अनुयायियों के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया।

  • ग्रामीण इलाकों में गुजरात के अमीर पाटीदार और उत्तर प्रदेश के जाट आंदोलन में सक्रिय थे। चूंकि अमीर समुदाय व्यापार अवसाद और गिरती कीमतों से बहुत प्रभावित थे, वे सविनय अवज्ञा आंदोलन के उत्साही समर्थक बन गए।

  • व्यापारियों और उद्योगपतियों ने आयातित वस्तुओं को खरीदने और बेचने से इनकार करके वित्तीय सहायता देकर आदोलन का समर्थन किया।

  • नागपुर क्षेत्र के औद्योगिक श्रमिक वर्ग ने सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी भाग लिया। रेलवे कर्मचारियों, डॉक वर्कर्स, छोटा नागपुर के खनिज आदि ने विरोध रैली और बहिष्कार अभियानों में भाग लिया।


सविनय अवज्ञा आंदोलन की मुख्य घटनाएं:

  • देश के विभिन्न हिस्से में नमक कानून का उल्लंघन।

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार।

  • शराब की दुकानों की पिकेटिंग।

  • वन कानूनों का उल्लंघन।


सविनय अवज्ञा आंदोलन में ब्रिटिश सरकार की प्रतिक्रिया:

  • कांग्रेस नेताओं का हिरासत में लिया गया।

  • आंदोलन का निर्मम दमन।

  • शांतिपूर्ण सत्याग्रहियों पर आक्रमण।

  • महिलाओं व बच्चों की पिटाई।

  • लगभग 1,00,000 को गिरफ्तार किया।


सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रति लोगों और औपनिवेशिक सरकार की प्रतिक्रिया:

  • लोगों ने सरकारी कानूनों को भंग करना शुरू कर दिया।

  • आंदोलन को दबाने के लिए सरकार ने कठोरता से काम लिया।

  • हजारों लोग जेल गए।

  • गाँधीजी को कैद कर लिया गया।

  • अब जनता इसमें बढ़ चढ़कर भाग लेने लगी। 


सविनय अवज्ञा आंदोलन की विशेषताएँ:

  • इस बार लोगों से अंग्रेजों का सहयोग न करने के साथ-साथ औपनिवेशिक कानूनों को न मानने के लिए आह्वान किया गया।

  • देश के विभिन्न भागों में हजारों लोगों ने नमक कानून तोड़ा तथा सरकारी नमक कारखानों के सामने प्रदर्शन किए।

  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार किया जाने लगा।

  • किसानों ने लगान और चौकीदारों ने कर चुकाने से इन्कार कर दिया।

  • वनों में रहने वाले लोगों ने वन कानूनों का उल्लंघन करना आरंभ कर दिया।


सविनय अवज्ञा आंदोलन में महिलाओं की भूमिका:

  • औरतों ने बहुत बड़ी संख्या में गाँधी के नमक सत्याग्रह में भाग लिया।

  • हजारों औरतें उनकी बात सुनने के लिए यात्रा के दौरान घरों से बहार आ जाती थीं। 

  • उन्होंने जलूसों में भाग लिया, नमक बनाया, विदेशी कपड़ों और शराब की दुकानों की पिकेटिंग की।

  • कई महिलाएँ जेल भी गईं।

  • ग्रामीण क्षेत्रों की औरतों ने राष्ट्र की सेवा को अपना पवित्र दायित्व माना ।


सविनय अवज्ञा आंदोलन कैसे असहयोग आंदोलन से अलग था?

  • असहयोग आंदोलन में लक्ष्य 'स्वराज' था लेकिन इस बार पूर्ण स्वराज की मांग थी।

  • असहयोग आंदोलन में कानून का उल्लंघन शामिल नहीं था जबकि इस आंदोलन में कानून तोड़ना शामिल था।


सविनय अवज्ञा आंदोलन की सीमाएँ:

  • अनुसूचित जाति की भागीदारी नहीं थी क्योंकि लंबे समय से कांग्रेस इनके हितों की अनदेखी कर रही थी।

  • मुस्लिम संगठनो द्वारा सविनय अवज्ञा के प्रति कोई खास उत्साह नही था क्योंकि 1920 के दशक के मध्य से कांग्रेस 'हिंदू महासभा' जैसे हिंदू धार्मिक संगठनों के करीब आने लगी थी।

  • दोनों समुदायों के बीच संदेह और अविश्वास का माहौल बना हुआ था।


1932 की पूना संधि के प्रावधान:

  • 1932 में पूना सन्धि महात्मा गांधी और डॉ भीमराव अंबेडकर के मध्य हुआ था।

  • इससे दमित वर्गों (जिन्हें बाद में अनुसूचित जाति के नाम से जाना गया) को प्रांतीय एवं केंद्रीय विधायी परिषदों में आरक्षित सीटें मिल गई। हालांकि उनके लिए मतदान सामान्य निर्वाचन क्षेत्रों में ही होता था।


सामूहिक अपनेपन का भाव:

  • वे कारक जिन्होंने भारतीय लोगों में सामूहिक अपनेपन की भावना को जगाया तथा सभी भारतीय लोगों को एक किया।

  • चित्र व प्रतीक :- भारत माता की प्रथम छवि अवनींद्र नाथ टैगोर द्वारा बनाई गई।

  • इस छवि के माध्यम से राष्ट्र को पहचानने में मदद मिली।

  • लोक कथाएँ :- राष्ट्रवादी घूम-घूम कर इन लोक कथाओं का संकलन करने लगे। ये कथाएँ परंपरागत संस्कृति की सही तस्वीर पेश करती थी तथा अपनी राष्ट्रीय पहचान को ढूंढने तथा अतीत में गौरव का भाव पैदा करती थी। बंगाल में रबींद्रनाथ टैगोर ने लोक कथाओं तथा बाल गीतों को संकलित किया। मद्रास में नटेसा शास्त्री ने “द फोकलर्स ऑफ साउथर्न इंडिया” नामक पुस्तक में तमिल लोक कथाओं का संकलन किया।

  • चिन्ह :- उदाहरण; झंडा। बंगाल में 1905 में स्वदेशी आंदोलन के दौरान सर्वप्रथम एक तिरंगा (हरा, पीला, लाल) बनाया गया जिसमें 8 कमल, चरखा तथा अर्धचंद्राकार आकृति शामिल थे।

  • 1921 तक आते आते महात्मा गांधी ने भी सफेद, हरा और लाल रंग का तिरंगा तैयार कर लिया था।

  • इतिहास की पुर्नव्याख्या :- बहुत से भारतीय महसूस करने लगे थे कि राष्ट्र के प्रति गर्व का भाव जगाने के लिए भारतीय इतिहास को अलग ढंग से पढ़ाना चाहिए ताकि भारतीय गर्व का अनुभव कर सकें।

  • गीत :- 1870 के दशक में सर्वप्रथम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने वंदे मातरम गीत की रचना की। वंदे मातरम गीत इनके उपन्यास “आनंद मठ” में संकलित है। मातृभूमि की स्तुति के रूप में यह गीत बंगाल के स्वदेशी आंदोलन में खूब गाया गया।


Question – "राष्ट्रवाद का विचार भारतीय लोककथाओ को पुनर्जीवित करने के आंदोलन के माध्यम से विकसित हुआ।" राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में इस कथन की व्याख्या कीजिए।

Answer –

  • (i) उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में भारत में राष्ट्रवादियों ने भाटों द्वारा गाई गई लोक कथाओं को रिकॉर्ड करना शुरू किया।
  • (ii) उन्होंने लोकगीत एकत्र करने के लिए गाँवों का दौरा किया।
  • (iii) इन कहानियों ने पारंपरिक संस्कृति की सच्ची तस्वीर पेश की जिसे बाहरी ताकतों द्वारा भ्रष्ट और क्षतिग्रस्त कर दिया गया था।
  • (iv) अपनी राष्ट्रीय पहचान की खोज करने और अपने अतीत के प्रति गौरव की भावना को पुनः स्थापित करने के लिए इस लोक परंपरा को संरक्षित करना आवश्यक था।
  • (v) बंगाल में, रवींद्रनाथ टैगोर ने स्वयं गाथाएँ, नर्सरी कविताएँ और मिथक एकत्र करना शुरू किया और लोक पुनरुत्थान के आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • (vi) मद्रास में, नटेसा शास्त्री ने तमिल लोक कथाओं का एक विशाल चार-खंड संग्रह, द फोकलोर ऑफ साउथर्न इंडिया प्रकाशित किया।
  • (vii) उनका मानना ​​था कि लोकगीत राष्ट्रीय साहित्य है; यह 'लोगों के वास्तविक विचारों और विशेषताओं की सबसे विश्वसनीय अभिव्यक्ति है'।

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