Class 10 NCERT Civics Chapter 4 Notes & Question Answer - राजनीतिक दल
Chapter 04 – राजनीतिक दल (Political Party)
राजनीतिक दल :
लोगों का ऐसा संगठित समूह जो चुनाव लड़ने और सरकार में राजनीतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है।
राजनीतिक दल के घटक :
- नेता
- सक्रिय सदस्य
- अनुयायी या समर्थक
राजनीतिक दल का कार्य :
- चुनाव लड़ना
- नीतियों और कार्यक्रमों को मतदाता के सामने रखना
- कानून निर्माण
- सरकार बनाना और सरकार चलाना
- विरोधी पक्ष की भूमिका निभाना
- मुद्दों को उठाना तथा आंदोलन की शुरूआत
- कल्याण कार्यक्रमों को लोगों तक पहुँचाना
- जनमत का निर्माण
लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका :
- सरकार की नीतियों पर नज़र रखना।
- सरकार की गलत नीतियों का विरोध करना।
- सरकार चलाने में सकरात्मक भूमिका निभाना।
राजनीतिक दल की जरूरत क्यों?
- आधुनिक लोकतंत्र राजनीतिक दल के बिना नहीं चल सकता।
- अगर दल न हो तो सारे उम्मीदवार स्वतंत्र या निर्दलीय होंगे तब इनमें से कोई बड़े नीतिगत बदलाव के बारे में लोगों से चुनावी वायदे नहीं कर पाएगा।
- सरकार तो बन जाएगी पर उसकी उपयोगिता संदिग्ध होगी।
- प्रतिनिधित्व पर आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक।
- देश के प्रति उत्तरदायी सरकार के लिए आवश्यक।
- सरकार की नीतियों पर अंकुश लगाने के लिए।
- सरकार का समर्थन करने एवं उस पर अंकुश रखने हेतु।
- जब समाज बड़े और जटिल हो जाते हैं तब उन्हें विभिन्न मुद्दों पर अलग- अलग विचारों को समेटने और सरकार की नजर में लाने के लिए राजनीतिक दलों की जरूरत होती है।
दलीय व्यवस्थाएँ :
एक दलीय व्यवस्था:- सिर्फ एक ही दल को सरकार बनाने और चलाने की अनुमति होती है उदाहरण : चीन
द्विदलीय व्यवस्था:- सत्ता आमतौर पर दो मुख्य दलों के बीच बदलती रहती है। उदाहरण : यू.एस.ए., यू.के
बहुदलीय व्यवस्था:- जब कई दलों में राजनीतिक सत्ता पाने के लिए होड़ लगी रहती है तथा दो से अधिक पार्टी के सत्ता हासिल करने की संभावना रहती है। उदाहरण : भारत
Question – भारत ने बहुदलीय प्रणाली क्यों अपनाई? उपयुक्त तर्कों के साथ समझाइए। (2025)
Answer –
- (i) पार्टी प्रणाली कोई ऐसी चीज़ नहीं है जिसे कोई भी देश चुन सकता है। प्रत्येक देश अपनी विशेष परिस्थितियों के अनुसार एक पार्टी प्रणाली विकसित करता है।
- (ii) भारत ने अपनी सामाजिक विविधता के कारण बहुदलीय प्रणाली को अपनाया।
- (iii) भारत में भौगोलिक विविधता बहुत अधिक है। इसलिए, इतने बड़े देश में विविधता दो या तीन दलों द्वारा समाहित नहीं की जा सकती।
- (iv) बहुदलीय प्रणाली विभिन्न प्रकार के हितों और विचारों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अवसर प्रदान करती है।
- (v) बहुदलीय प्रणाली भारत के सभी अलग-अलग वर्ग-समूह के लोगों को अपनी बात रखने का एक मंच प्रदान करता है।
गठबंधन की सरकार :
जब चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता तो दो या दो से अधिक राजनीतिक दल विकास के साझा कार्यक्रम के साथ मिलकर सरकार चलाते हैं, इसे ही गठबंधन की सरकार कहते हैं।
क्षेत्रीय दल :
जब कोई दल राज्य विधानसभा के चुनाव में पड़े कुल मतों का 6% या उससे अधिक हासिल करती है और कम से कम दो सीटों पर जीत हासिल करती है तो उसे राज्य के राजनीतिक दल के रूप में मान्यता मिलती है।
राष्ट्रीय दल :
अगर कोई दल लोकसभा चुनाव में पड़े कुल वोट का अथवा चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में पड़े कुल वोटों का 6% प्रतिशत हासिल करता है और लोकसभा चुनाव में कम से कम चार सीटों पर जीत दर्ज करता है तो उसे राष्ट्रीय दल की मान्यता दी जाती है।
भारत मे दल :
नवीनतम जानकारी के अनुसार 2023 में जारी निर्वाचन आयोग की अधिसूचना के अनुसार देश में छः मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दल हैं।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC):
- इसे कांग्रेस पार्टी के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बहुत पुरानी पार्टी है जिसकी स्थापना 1885 में हुई थी।
- भारत की आजादी में इस पार्टी की मुख्य भूमिका रही है।
- भारत की आजादी के बाद के कई दशकों तक कांग्रेस पार्टी ने भारतीय राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाई है।
- आजादी के बाद के सत्तर वर्षों में पचास से अधिक वर्षों तक इसी पार्टी की सरकार रही है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP):
- इस पार्टी की स्थापना 1980 में हुई थी।
- इस पार्टी को भारतीय जन संघ के पुनर्जन्म के रूप में माना जा सकता है।
- यह पार्टी पहली बार 1998 में सत्ता में आई और 2004 तक शासन किया।
- उसके बाद यह पार्टी 2014 में सत्ता में आई है।
बहुजन समाज पार्टी (BSP):
- इस पार्टी की स्थापना कांशीराम के नेतृत्व में 1984 में हुई थी।
- यह पार्टी बहुजन समाज के लिये सत्ता चाहती है।
- बहुजन समाज में दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग आते हैं।
- इस पार्टी की पकड़ उत्तर प्रदेश में बहुत अच्छी है और यह उत्तर प्रदेश में दो बार सरकार भी बना चुकी है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) CPI(M):
- इस पार्टी की स्थापना 1964 में हुई थी।
- इस पार्टी की मुख्य विचारधारा मार्क्स और लेनिन के सिद्धांतों पर आधारित है।
- यह पार्टी समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता का समर्थन करती है।
- इस पार्टी को पश्चिम बंगाल, केरल और त्रिपुरा में अच्छा समर्थन प्राप्त है; खासकर से गरीबों, मिल मजदूरों, किसानों, कृषक श्रमिकों और बुद्धिजीवियों के बीच।
- लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इस पार्टी की लोकप्रियता में तेजी से गिरावट आई है और पश्चिम बंगाल की सत्ता इसके हाथ से निकल गई है।
आम आदमी पार्टी (AAP):
- आम आदमी पार्टी का गठन 2011 के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के बाद 26 नवंबर 2012 को हुआ।
- पार्टी की स्थापना जवाबदेही, स्वच्छ प्रशासन, पारदर्शिता और सुशासन के विचार पर की गई थी।
- पार्टी अपने गठन के एक साल बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जिसने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के समर्थन से सरकार बनाई।
- 2022 के गुजरात विधान सभा चुनाव के बाद यह गुजरात की राजनीति में तीसरे मोर्चे के रूप में भी उभरी। फिलहाल आप ने पंजाब और दिल्ली में सरकार बनाई है।
- 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने लोकसभा में एक सीट हासिल की।
नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP):
- नेशनल पीपुल्स पार्टी श्री पी. ए. संगमा के नेतृत्व में जुलाई 2013 में गठित हुई।
- एनपीपी पूर्वोत्तर भारत की पहली राजनीतिक पार्टी है जिसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त हुआ है।
- पार्टी देश की विविधता में विश्वास करती है और मानती है कि विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग विकासात्मक चुनौतियाँ हैं।
- पार्टी का मूल दर्शन सभी को शिक्षा और रोजगार के साथ-साथ समाज के सभी वर्गों का सशक्तिकरण करना है।
- नेशनल पीपुल्स पार्टी ने मेघालय में सरकार बनाई और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में इसकी मौजूदगी है।
- 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में एनपीपी को लोकसभा में एक सीट हासिल हुई।
राजनीति के दलों के समक्ष चुनौतियाँ :
- वंशवाद की चुनौती
- पारदर्शिता का अभाव – राजनीतिक दल नियमित आंतरिक चुनाव नहीं कराते और बैठकें नहीं करते।
- पार्टियों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र का अभाव।
- विकल्पहीनता – मतदाताओं के लिए वह सार्थक विकल्प के रूप में प्रतीत नहीं होते।
- पार्टियों में धन और बाहुबल की बढ़ती भूमिका।
राजनीतिक दलों को कैसे सुधारा जा सकता है?
हाल में उठाए गए कदम :-
- दल बदल विरोधी कानून
- शपथपत्र के माध्यम से अपनी संपति तथा अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी अनिवार्य।
- सांगठनिक चुनाव कराना तथा आयकर रिटर्न भरना जरूरी।
भविष्य के लिए सुझाव :-
- सदस्यों का रिकार्ड रखना अनिवार्य।
- महिलाओं के लिए रिजर्व सीट।
- चुनाव का खर्च सरकार उठाए।
- लोगों की भागीदारी बढ़ाकर।
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