Class 6 sst Chapter 7 NCERT Solution - भारत की सांस्कृतिक जड़े

Chapter 07 : भारत की सांस्कृतिक जड़े

प्रश्न: वेद क्या हैं और उनका क्या महत्व है?

वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। इनकी रचना ऋषियों और ऋषिकाओं ने संस्कृत भाषा में की थी। ‘वेद’ का अर्थ है— ज्ञान। इनमें देवताओं की स्तुतियाँ, प्रार्थनाएँ और जीवन के सत्य बताए गए हैं। वेद एकता, सत्य, संतुलन और अच्छे कर्म का संदेश देते हैं।

प्रश्न: वैदिक दर्शन की मुख्य अवधारणाएँ क्या हैं?

वैदिक दर्शन में मुख्य अवधारणाएँ हैं:

  • सत्य की एकता: "एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति" - सत्य एक है, लेकिन विद्वान उसे अलग-अलग नामों से पुकारते हैं।
  • ब्रह्म: संपूर्ण सृष्टि एक दिव्य सत्ता 'ब्रह्म' से उत्पन्न हुई है।
  • आत्मा की दिव्यता: "अहम् ब्रह्मास्मि" - मैं ब्रह्म हूँ, यानी हर आत्मा दिव्य है।
प्रश्न: बुद्ध के मुख्य उपदेश क्या थे?

बुद्ध के मुख्य उपदेश थे:

  • अहिंसा: किसी भी प्राणी को नुकसान न पहुँचाना।
  • आत्म-अनुशासन: अपने मन और विचारों पर विजय पाना सबसे बड़ी जीत है।
  • आंतरिक शुद्धता: बाहरी रीति-रिवाजों से नहीं, बल्कि सत्य और धर्म के पालन से व्यक्ति शुद्ध होता है।
प्रश्न: जैन मत के मुख्य सिद्धांत क्या हैं?

जैन मत के मुख्य सिद्धांत हैं:

  • अहिंसा: सभी सजीव प्राणियों के प्रति हिंसा न करना।
  • अनेकांतवाद: सत्य के कई पहलू होते हैं, कोई एक दृष्टिकोण पूर्ण सत्य नहीं है।
  • अपरिग्रह: ज़रूरत से ज़्यादा संग्रह न करना और सादगी से जीवन बिताना।
प्रश्न: जनजातीय परंपराओं का भारतीय संस्कृति में क्या योगदान है?

जनजातीय समुदायों की मान्यताओं, कलाओं और प्रथाओं का हिंदू दर्शन और संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह एक दो-तरफ़ा आदान-प्रदान रहा है, जिससे भारतीय संस्कृति समृद्ध हुई है। जनजातीय लोग प्रकृति (पर्वत, नदियों, पेड़ों) और भूमि को पवित्र मानकर उनकी पूजा करते हैं।

प्रश्न: बौद्ध और जैन मत में क्या समानताएँ हैं?

दोनों ही मत अहिंसा, आत्म-अनुशासन और सादगी पर ज़ोर देते हैं। दोनों ने वैदिक कर्मकांडों के जटिल स्वरूप को छोड़कर सीधे आध्यात्मिक सत्य की खोज पर बल दिया। दोनों ने संघ (भिक्षुओं के समुदाय) की स्थापना की।

NCERT अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1: यदि आप नचिकेता होते तो आप यम से कौन-से प्रश्न पूछते? इन्हें 100–150 शब्दों में लिखिए।

यदि मैं नचिकेता होता, तो मैं यम से जीवन और मृत्यु के रहस्य के बारे में पूछता। मेरे प्रश्न ये होते:

  • हे यमराज, मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है?
  • जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है?
  • सच्चा सुख और शांति कैसे प्राप्त हो सकती है?
  • मनुष्य को अपने जीवन में किन मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए?
प्रश्न 2: बौद्ध मत के कुछ केंद्रीय विचारों को समझाइए। इन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  • सभी जीवों के प्रति अहिंसा।
  • सही विचार और सही कर्म पर जोर।
  • लालच, मोह और अज्ञान को छोड़ना।
  • मन की शुद्धि और आंतरिक अनुशासन।
  • दुःख के कारणों को समझकर उन्हें समाप्त करना।
प्रश्न 3: बुद्ध के उस उद्धरण पर कक्षा में चर्चा कीजिए... "जल से व्यक्ति शुद्ध नहीं हो सकता..."

इस उद्धरण का अर्थ है कि केवल बाहरी स्नान या दिखावटी रीति-रिवाज से व्यक्ति की आंतरिक शुद्धि नहीं होती। असली शुद्धि तब आती है जब व्यक्ति के मन और आचरण में सत्य, ईमानदारी और अच्छे गुणों (धर्म) का निवास हो। यह बात हमें दिखावे की जगह चरित्र निर्माण पर ध्यान देने की सीख देती है।

प्रश्न 4: जैन मत के कुछ मुख्य विचारों को समझाइए। इन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  • अहिंसा: यह जैन मत का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
  • अनेकांतवाद: सत्य के कई पहलू हो सकते हैं।
  • अपरिग्रह: जरूरत से ज्यादा संचय न करना।
प्रश्न 5: कक्षा में आंद्रे बेते के कथन पर विचार-विमर्श कीजिए।

भारत में हजारों सालों से जातियों और जनजातियों ने एक-दूसरे की धार्मिक मान्यताओं को प्रभावित किया। हिन्दू विचारधारा ने जनजातियों को प्रभावित किया और जनजातीय विश्वासों ने भी हिन्दू परंपराओं को समृद्ध किया। इससे हमें पता चलता है कि भारतीय संस्कृति एकतरफा नहीं, बल्कि आपसी आदान-प्रदान से समृद्ध हुई है।

प्रश्न: सही या गलत बताइए।
  1. वैदिक ऋचाओं को ताड़-पत्र की पांडुलिपियों पर लिखा गया है। - गलत (उन्हें मौखिक रूप से सुरक्षित रखा गया था)।
  2. वेद भारत के सबसे प्राचीन ग्रंथ हैं। - सही
  3. "एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति" में ब्रह्मांड की शक्तियों की एकता की मान्यता प्रकट होती है। - सही
  4. बौद्ध मत वेदों से अधिक पुराना है। - गलत
  5. जैन मत का उद्भव बौद्ध मत की एक शाखा के रूप में हुआ। - गलत (यह एक स्वतंत्र दर्शन है)।
  6. बौद्ध और जैन मत दोनों ही शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तथा सभी जीवों को नुकसान न पहुँचाने का समर्थन करते हैं। - सही
  7. जनजातीय विश्वास परंपराएँ आत्मा और छोटे देवों तक सीमित हैं। - गलत (उनमें एक परमेश्वर की उच्च संकल्पना भी होती है)।

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