पालमपुर गांव की कहानी – Class 9 NCERT Economics Chapter 1 Notes & Question Answer

Chapter 01 : पालमपुर गाँव की कहानी (Story of Palampur Village)


पालमपुर गाँव का परिचय:

  • पालमपुर में कृषि ही प्रमुख उत्पादन प्रक्रिया है।

  • पालमपुर में पक्की सड़क है जो पालमपुर गाँव को उनके पड़ोसी गाँव रायगंज से जोड़ती है।

  • पालमपुर रोड पर विभिन्न प्रकार के परिवहन के साधन हैं, जैसे बैलगाड़ी, तांगा, ट्रैक्टर, जीप, मोटरसाइकिल, ट्रक आदि।

  • पालमपुर में बिजली की उपलब्धता है। कई घरों में बिजली है और ट्यूबवेल भी बिजली से चलते हैं।

  • गाँव में 450 परिवार रहते है। 150 परिवारों के पास, खेती के लिए भूमि नहीं है। बाकी 240 परिवारों के पास 2 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे भूमि के टुकड़े हैं।

  • गाँव में ज़्यादातर भूमि के स्वामी उच्च जाति के परिवार है।

  • पालमपुर गांव में शिक्षा के लिए एक हाई स्कूल, दो प्राथमिक विद्यालय, एक स्वास्थ्य केन्द्र और एक निजी अस्पताल भी है।


गैर कृषि क्रियाएं (Non Farm Activities):

  • कृषि के अतिरिक्त जो अन्य कार्य आजीविका के लिए किए जाते हैं, गैर कृषि क्रियाएं कहलाते हैं।

  • पालमपुर में 25% लोग गैर कृषि क्रियाओं में भी लगे हुए हैं जैसे; डेयरी, लघु विनिर्माण, परिवहन, दुकानदारी इत्यादि।


उत्पादन का संगठन (Organization of Production):

  • उत्पादन का उद्देश्य या प्रयोजन ऐसी वस्तुएँ और सेवाएँ उत्पादन करना है जिनकी हमें आवश्यकता है। 

  • उत्पादन (Production) Input (कच्चे माल) को Output (तैयार माल) में बदलने की एक प्रक्रिया है।

  • उत्पादन क्रियाओं के लिए निम्न चार संसाधनों की आवश्यकता होती है — 

    • भूमि (Land)— अन्य प्राकृतिक संसाधन जैसे; जल, वन, खनिज।

    • श्रम (Labour)— मानव प्रयास जैसे; मानसिक श्रम अथवा शारीरिक श्रम।

    • भौतिक पूंजी (Capital)— मानव निर्मित वस्तुएं जैसे; औजार, मशीन, भवन। इन वस्तुओं को लेने के बाद यह वस्तु है हमारे पास लंबे समय तक बनी रहती हैं। ये स्थायी पूंजी (Fixed Capital) होती हैं।

    • कच्चा माल और नगद मुद्रा। उत्पादन के दौरान ये वस्तुएं समाप्त हो जाती है और इन वस्तुओं की बार-बार आवश्यकता पड़ती है। ये कार्यशील पूंजी (Working Capital) है।

    • मानव पूंजी (Human Capital)— उत्पादन करने के लिए भूमि, श्रम और भौतिक पूंजी को एक साथ करने योग्य बनाने के लिए ज्ञान और उद्यम की आवश्यकता होती है। इसे ही मानव पूंजी कहा जाता है।


पालमपुर गाँव में कृषि:

  • पालमपुर के लोगों का मुख्य पेशा कृषि उत्पादन है। यहां काम करने वाले लोगों में 75% लोग अपने जीवनयापन के लिए खेती पर निर्भर है।

  • कृषि ऋतु को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है —

  • वर्षा ऋतु (खरीफ़)

    • अवधि: जुलाई-अक्टूबर

    • फसल: ज्वार, बाजरा, चावल कपास, गन्ना तम्बाकु आदि।

  • शरद् ऋतु (रबी)

    • अवधि: अक्टूबर-मार्च

    • फसल: गेहुँ, सरसों, दालें, आलु आदि।

  • ग्रीष्म ऋतु (जायद)

    • अवधि: मार्च-जून

    • फसल: तरबूज, खीरा, फलियाँ सब्जियाँ फूल इत्यादि ।

  • बिजली के विस्तार से सिंचाई व्यवस्था में सुधार हुआ परिणाम स्वरुप किसान दोनों खरीफ़ और रबी दोनों ऋतुओं की फसल उगाने में सफल हो सके हैं।


बहुविध फसल प्रणाली (Multiple Cropping System):

  • एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने को बहुविध फसल प्रणाली कहते है। यह भूमि के किसी एक टुकड़े में उपज बढ़ाने की सबसे सामान्य प्रणाली है। 

  • पालमपुर में सभी किसान कम से कम दो मुख्य फसलें पैदा करते हैं। कई किसान पिछले पंद्रह-बीस वर्षों से तीसरी फसल के रूप में आलू पैदा कर रहे हैं।


खेती करने के तरीके:

  • परम्परागत कृषि (Traditional farming):-

    • कृषि में पारम्परिक बीजों का प्रयोग

    • कम सिचांई की आवश्यकता

    • उर्वरको के रूप में गाय के गोबर अथवा दूसरी प्राकृतिक खाद का प्रयोग

    • पारम्परिक हल का प्रयोग

    • कुओं नदी, रहट, तालाब से सिंचाई


  • आधुनिक कृषि (Modern farming):-

    • कृषि में अधिक उपज देने वाले HYV का प्रयोग

    • अधिक सिंचाई की आवश्यकता

    • रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग

    • मशीनों का प्रयोग

    • नलकूपों और पम्पिंग सेट के द्वारा सिंचाई


  • 1 हैक्टेयर = 10000 वर्ग मीटर


हरित क्रान्ति (Green Revolution):

  • हरित क्रांति का शाब्दिक अर्थ है - कृषि क्षेत्र में होने वाला तीव्र परिवर्तन, एक ऐसा परिवर्तन जिससे न केवल उत्पादन में वृद्धि हुई वरन् फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ हो।

  • भारत में हरित क्रांति 1960 के दशक में प्रारंभ हुआ।

  • भारत में हरित क्रांति के जनक एम. एस. स्वामीनाथन थे।


हरित क्रान्ति से भारतीय कृषि पर पड़े  सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact):

  • हरित क्रान्ति में भारतीय कृषकों ने अधिक उपज वाले (HYV) बीजो का प्रयोग किया।

  • इससे गेहूँ और चावल की फसलों की उपज में बहुत वृद्धि हुई।

  • परम्परागत बीजों की तुलना में HYV बीज अधिक उपज वाले बीज सिद्ध हुए।

  • किसानों ने कृषि में ट्रैक्टर और फसल काटने की मशीनों का उपयोग करना प्रारम्भ कर दिया।

  • रासायनिक खादों का प्रयोग करना शुरू किया।


हरित क्रान्ति से मृदा को नुकसान (Negative Impact):

  • हरित क्रान्ति के कारण रासायनिक उर्वरकों के अधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता कम हो गई।

  • नलकूपों से सिंचाई के कारण भौमजल स्तर कम हो गया।

  • रासायनिक उवर्रक आसानी से पानी में घुलकर मिट्टी से नीचे चले जाते हैं और जल को दूषित करते हैं।

  • ये बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीवाणु नष्ट कर देते हैं जो मिट्टी के लिए उपयोगी हैं।


पालमपुर में भूमि का वितरण:

  • पालमपुर में 450 परिवारों में से लगभग एक तिहाई अर्थात् 150 परिवारों के पास खेती के लिये भूमि नहीं हैं जो अधिकाशत: दलित है।

  • 240 परिवार जिनके पास भूमि है, 2 हेक्टेयर से भी कम क्षेत्रफल वाले टुकड़ों पर खेती करते हैं।

  • भूमि के ऐसे टुकड़ों पर खेती करने से किसानों के परिवार को पर्याप्त आमदनी नहीं होती।

  • पालमपुर में मझोले किसान और बड़े किसानों के 60 परिवार हैं जो 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर खेती करते है।

  • कुछ बड़े किसानों के पास 10 हेक्टेयर या इससे अधिक की भूमि है।


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