Class 9 Political Science Chapter 4 NCERT Notes & Question Answer – संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions)

Chapter 04 – संस्थाओं का कामकाज (Working of Institutions)



अन्य पिछड़ी जाति आयोग :

  • उद्देश्य : सरकारी नौकरियों में सामाजिक, और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों को 27% आरक्षण देना।

  • आयोग का नाम: मंडल आयोग, 1979 में गठित किया गया।

  • अध्यक्ष: बी. पी. मंडल (बिंदेश्वरी प्रसाद मण्डल)


संस्था (Institution):

  • नागरिको की आधारभूत सुविधाएँ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और विकास, कल्याण परक सुविधाएँ नागरिकों को प्रदान करने वाली व्यवस्थाओं को ही संस्था / संस्थाएँ कहा जाता है।


संसद (Parliament):

  • भारत में निर्वाचित सदस्यों की राष्ट्रीय सभा को संसद कहते हैं तथा राज्य स्तर पर इसे विधानसभा कहते हैं।

  • संसद एक ऐसा मंच है जहाँ पर नागरिकों के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि कानून / विधि निर्माण का कार्य करते हैं। 

  • संसद तीन भागों से मिलकर बनता है — राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा।

  • संसद के दो सदन होते हैं –

    • लोकसभा

    • राज्य सभा


संसद के राजनैतिक अधिकार :

  • कानून बनाने, संशोधन करने तथा पुराने कानून की जगह नये कानून बनाने का अधिकार।

  • सरकार चलाने वालों को नियंत्रित करने का अधिकार।

  • सरकार के हर पैसे पर नियंत्रण का अधिकार।

  • सार्वजनिक मामलों व राष्ट्रीय नीति पर चर्चा का अधिकार।


लोकसभा (House of People or Lower House):

  • लोकसभा में जनता द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं। 

  • इसका अध्यक्ष लोकसभा का सदस्य होता है जो स्पीकर कहलाता है। 

  • इसके सदस्यों की संख्या 543 होती है।

  • सदस्यों का चुनाव लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रुप से होता है।

  • धन के मामले में अधिक अधिकार।

  • मंत्रिपरिषद पर नियंत्रण

  • अधिकतर मामलों में सर्वोच्च अधिकार


राज्यसभा (Council of States or Upper House):

  • राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं। 

  • इसका अध्यक्ष उपराष्ट्रपति होता है। 

  • इसके सदस्यों की कुल संख्या 250 है जिन में से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं।

  • सदस्यों का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

  • धन के मामले में कम अधिकार।

  • मंत्रिपरिषद पर सीधा नियंत्रण नहीं होता।

  • राज्यों के सम्बन्ध में विशेष अधिकार।


लोकसभा और राज्यसभा में अंतर:

  • लोकसभा के सदस्यों का चुनाव लोगों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से होता है।

  • राज्यों के संबंध में राज्यसभा को कुछ विशेष अधिकार दिए गए हैं लेकिन अधिकतर मसलों पर सर्वोच्च अधिकार लोकसभा के पास ही है।

  • संयुक्त अधिवेशन में लोकसभा के सदस्य अधिक होने के कारण लोकसभा के विचार को प्राथमिकता मिलने की संभावना रहती है।

  • लोकसभा धन के मामले में अधिक अधिकारों का प्रयोग करती है।

  • लोकसभा मंत्रिपरिषद् को नियंत्रित करती है लेकिन राज्यसभा को यह अधिकार नहीं है।


लोकसभा बनाम राज्यसभा (Lok Sabha vs Rajya Sabha):

  • ​यद्यपि राज्यसभा को ‘उच्च सदन’ कहा जाता है, लेकिन व्यवहार में लोकसभा अधिक शक्तिशाली है:

  • सामान्य विधेयक: मतभेद होने पर संयुक्त अधिवेशन (Joint Session) में लोकसभा के सदस्यों की अधिक संख्या के कारण उनकी बात मानी जाती है।

  • धन विधेयक (Money Bill): बजट जैसे मामलों में राज्यसभा उसे खारिज नहीं कर सकती, केवल 14 दिन की देरी कर सकती है।

  • सरकार पर नियंत्रण: लोकसभा ही मंत्रिपरिषद को नियंत्रित करती है। अगर लोकसभा में 'अविश्वास प्रस्ताव' (No Confidence Motion) पास हो जाए, तो प्रधानमंत्री सहित सभी मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ता है। यह शक्ति राज्यसभा के पास नहीं है।


कार्यपालिका:

  • सरकार की नीतियों को 'कार्यरूप' देनेवाले को कार्यपालिका या सरकार कहते हैं।

  • कार्यपालिका के दो हिस्से होते है –


  • राजनैतिक कार्यपालिका:- प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद मिलकर राजनैतिक कार्यपालिका का गठन करते हैं। 

  • मंत्रिपरिषद का काम होता है सरकार के कार्यक्रमों और नीतियों को मूर्तरूप देना या क्रियांवयन करना। इसलिए मंत्रिपरिषद को कार्यपालिका कहा जाता है। 

  • राजनैतिक कार्यपालिका के सदस्य जनता द्वारा चुनकर आते हैं।


  • स्थायी कार्यपालिका:- यह नौकरशाहो (अधिकारियों व कर्मचारियों) से मिलकर बनी होती है। 

  • नौकरशाहों का चयन अखिल भारतीय सिविल सर्विसेज द्वारा होता है। 

  • सरकारें बदलने के बावजूद नौकरशाहों यानी स्थायी कार्यपालिका के कार्यकाल में कोई रुकावट नहीं आती है।


  • मंत्री ज्यादा शक्तिशाली क्यों? 

  • क्योंकि लोकतंत्र में जनता की इच्छा सर्वोपरि है और मंत्री जनता द्वारा चुना गया प्रतिनिधि है। इसलिए अंतिम निर्णय मंत्री का ही होता है, नौकरशाह का नहीं।


प्रधानमंत्री :

  • प्रधानमंत्री सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था है।

  • राष्ट्रपति, लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं।

  • प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है और वास्तव में सभी सरकारी शक्तियों का प्रयोग करता है।

  • प्रधानमंत्री का कार्यकाल तय नहीं होता।

  • वह तब तक अपने पद पर रह सकता है जब तक वह पार्टी या गठबंधन का नेता है।


मंत्रिपरिषद :

  • मंत्रिपरिषद उस निकाय का सरकारी नाम है जिसमें सारे मंत्री होते हैं। इसमें आम तौर पर 60 से 80 मंत्री होते हैं। मंत्रियों की रैंक इस प्रकार है –


  • कैबिनेट मंत्री:- अक्सर सत्तादल के शीर्ष नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया जाता है। उन्हें प्रमुख मंत्रालयों का भार दिया जाता है। परिषद में कैबिनेट मंत्रियों की संख्या लगभग 20 होती है।


  • स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री:- इन्हें अक्सर छोटे मंत्रालयों का भार दिया जाता है। ये केवल निमंत्रण मिलने पर ही कैबिनेट की बैठक में शामिल होते हैं।


  • राज्य मंत्री:- अपने विभाग के कैबिनेट मंत्रियों से जुड़े होते हैं और उनकी सहायता करते हैं।


भारतीय प्रधानमंत्री के अधिकार :

  • कैबिनेट की बैठकों की अध्यक्षता।

  • विभिन्न विभागों के कार्य का समन्वय।

  • विभिन्न विभागों की सामान्य निगरानी।

  • वह मंत्रियों को काम बांटता है और उन्हें बर्खास्त भी कर सकता है।

  • अगर प्रधानमंत्री इस्तीफा देता है, तो पूरा मंत्रालय भंग हो जाता है।


राष्ट्रपति :

  • भारत के राष्ट्राध्यक्ष राष्ट्रपति होते हैं। 

  • सरकार का हर निर्णय राष्ट्रपति के नाम से लिया जाता है लेकिन राष्ट्रपति का पद केवल अलंकारिक है।

  • जब कोई बिल संसद से पास हो जाता है तो उस पर राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद ही वह कानून बन पाता है।

  • सरकार के हर महत्वपूर्ण निर्णय को लागू करने से पहले उस पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर होना जरूरी है। 

  • सभी अंतर्राष्ट्रीय संधि समझौते राष्ट्रपति के नाम से ही बनाए जाते हैं।

  • नोट: राष्ट्रपति, सभी कार्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।


भारत का राष्ट्रपति नियुक्त होने के लिए अनिवार्य योग्यताएं :

  • भारत का नागरिक हो।

  • आयु 35 वर्ष से अधिक हो।

  • दिवालिया या सजायाफ्ता न हो।

  • सरकार के अंतर्गत किसी लाभप्रद पद पर कार्यरत न हो।

  • लोकसभा का सदस्य बनने के योग्य हो।


न्यायपालिका :

  • न्यायपालिका का अर्थ है देश की सभी अदालतों का समूह। 

  • भारत में न्यायपालिका एकीकृत (Integrated) और स्वतंत्र (Independent) है।

  • न्यायपालिका विधायिका या कार्यपालिका के नियंत्रण में नहीं है।


भारतीय न्यायपालिका की संरचना:

  • ​पूरे देश के लिए सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)।

  • ​राज्यों में उच्च न्यायालय (High Courts)।

  • ​जिला न्यायालय और स्थानीय स्तर के न्यायालय।


न्यायपालिका के अधिकार :

  • इसके पास न्याय करने का अधिकार और कानूनी विवादों के निबटारे का अधिकार होता है।

  • संविधान की व्याख्या: सर्वोच्च न्यायालय संविधान का व्याख्याता है।

  • न्यायिक समीक्षा (Judicial Review): यदि कोई कानून या सरकार का फैसला संविधान के खिलाफ है, तो अदालत उसे अमान्य घोषित कर सकती है।

  • मौलिक अधिकारों की रक्षा: नागरिक अपने अधिकारों के उल्लंघन होने पर अदालत जा सकते हैं।

  • जनहित याचिका (Public Interest Litigation - PIL): कोई भी व्यक्ति जनहित के मुद्दों पर अदालत में याचिका दायर कर सकता है।

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